अपने गुनाहों से मा’फी मांग कर अल्लाह को राजी करने का पवित्र महीना है रमज़ान: मौलाना सादिक कासमी

0
116

पूर्णियां-१/मई २०२१ : रमज़ान का पवित्र महीना अल्लाह की रहमतों,बरकतों और गुनाहों से मा’फी मांग कर अल्लाह को राजी करने,इबादत करने,अपनी मगफिरत कराने और जहन्नुम की आग से मुक्ति कराने का पवित्र महीना है रमज़ान।उक्त बातें जमीअत उलमा-ए-जिला पूर्णियां के उपाध्यक्ष एवं बैसा प्रखंड अंतर्गत खपड़ा पंचायत के भावी समिति प्रत्याशी मौलाना सादिक कासमी धर्मबाड़ी ने आम मुसलमानों से कहीं। उन्होंने कहा कि रमज़ान का पहला भाग रहमत का समाप्त हो चुका है। दूसरे भाग मगफिरत का भी समाप्त होने वाला है। तीसरा भाग २१वीं रमज़ान से शुरू होगा जो जहन्नुम की आग से मुक्ति का होगा।

मौलाना ने कहा कि रोज़ा का असल मकसद है कि हम मुत्तकी व परहेज़गार बन जाएं और हम सभों के अन्दर में तक्वा व परहेज़गारी आ जाए। हम अल्लाह के दरबार में खूब रो-गिड़गिड़ाकर अपने गुनाहों की मा’फी करालें और अपने अल्लाह को राजी कर लें। अल्लाह ने कुरआन में फरमाया है कि रोजा को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत पर फर्ज किया गया है और तुम से पहले उम्मतियों(लोगों) पर भी फर्ज किया गया था। ऐसा नहीं है कि सिर्फ तुम्हारे ऊपर ही फर्ज किया गया है।(फर्ज का मतलब एकदम जरूरी,हर हाल में करना होगा वर्न बड़ा गुनाह होगा)*आम तौर पर सभी मुसलमान रमज़ान के पवित्र महीना में ही अपने माल की जकात निकालते हैं। जकात का मकसद असहाय व कमजोर लोगों की मदद और सहायता करना है,ताकि वो भी आर्थिक रूप से मजबूत हो सके। असहायों की मदद करने को कहा गया है ताकि वह भी अपनी ईद बेहतर तरीके से मना सके और अपनी जिंदगी खुशी खुशी जी सकें।अपने पड़ोसियों का ख्याल रखें वह चाहे जिस मजहब व धर्म का माननेवाला हो।


#हम सभी को सही मार्गदर्शन करने के लिए अल्लाह ने इसी पवित्र महीना में कुरआन को उतारा है।हम कुरआन को पढ़ें और समझें। कुरआन को समझ कर ही हम दीन और दुनिया में सही तरीके से आगे बढ़ सकते हैं। कुरआन हमें इबादत, ईमान,अख़लाक़ से लेकर सही ढंग से जिंदगी गुजारने का बेहतर तौर-तरीका बताता है। इसलिए इस पवित्र महीना में हम ज्यादा से ज्यादा कुरआन की तिलावत करें। इन दिनो हमारे देश में कोरोना महामारी की लहर चल रही है। अल्लाह हम सभी देशवासियों को कोरोना महफूज रखे। अपने घरों में रहकर खूब इबादत करें और अल्लाह से इस कोरोना बिमारी से मुक्ति की हर नमाज़ में रो रोकर दुआ करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here