इलाज़ के लिए 4-5 शहर रेफर होने के बाद भी किसी चमत्कार के इंतज़ार में घर पे पड़ा है सैफुल , स्वास्थ विभाग का घिनौना चेहरा आया सामने

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सीविल सर्जन को भेजा लीगल नोटिस,मुक़दमे की तयारी

अररिया: (मेराज खालिद ) पलासी प्रखंड के कुम्हिया का गांव का निवासी सैफुल (19) नामक एक युवक को बार बार रेफर करने के बाद भी कोई अस्पताल उसे एडमिट करने को तय्यार नहीं हुआ,
सर्वप्रथम सैफुल के बीमार पड़ने पर उनके पिता जमीर उद्दीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पलासी ले गए। अपने बेटे की गंभीर स्थिति के बावजूद, उसे वहां भर्ती नहीं किया गया, बल्कि प्राथमिक जांच के बाद, उन्होंने उसे डीसीएचसी फॉरबिसगंज रेफर कर दिया।
मो.जमीरद्दीन अपने बीमार बेटे को तुरंत उक्त DCHC फॉरबिसगंज ले गए, हालाँकि यहाँ भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया और आगे उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें या तो मधेपुरा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल या कटिहार मेंडकल कॉलेज ले जाने को कहा मजबूर बाप ने अपने गंभीर रूप से बीमार बेटे को प्रवेश और बेहतर इलाज के लिए कटिहार मेडिकल कॉलेज ले गए, हालाँकि यहाँ भी उन्हें प्रवेश से वंचित रखा गया था और मौखिक रूप से किसी अन्य चिकित्सा केंद्र में जाने के लिए कहा गया। सभी सरकारी चिकित्सा केंद्रों से निकाले जाने के बाद उन्होंने पूर्णिया के निजी अस्पतालों में अपनी किस्मत आजमाई, यहाँ भी उन्हें अपने बेटे के दाखिले के लिए उपलब्ध किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिला।ऐसी गंभीर स्थिति में और अपार निराशा के तहत वे अररिया सदर अस्पताल वापस आ गए, इस उम्मीद में कि उन्हें अपने बेटे के इलाज के लिए यहां प्रवेश मिलेगा। हालाँकि उन्हें यहाँ प्रवेश नहीं मिला, बल्कि उन्हें फिर से मधेपुरा मेडिकल कॉलेज में भेजा गया। मधेपुरा मेडिकल कॉलेज में भी उन्हें प्रवेश से वंचित रखा गया।
अंत में लगभग 4 से 5 मेडिकल सेंटरों से इनकार करने के बाद और लगभग 400 किलोमीटर अपने बीमार बेटे के साथ यात्रा करने के बाद घर लौटने के लिए मजबूर किया गया और अपने बेटे को घर पर ही रखा है , अपने दम पर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की, और वर्तमान में सैफुल्ला बिना किसी चिकित्सकीय सहायता के अपने घर पर ही अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है।

“अररिया का मुद्दा ” नामक सामाजिक संगठन के संचालक फैसल जावेद यासीन ने साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया के अररिया सिविल सर्जन हमेशा इस मामले में संज्ञान में रहे हैं मैंने उन्हें खुद स्तिथि से अवगत कराया था किंतु मरीज अब भी अपने घर पर इलाज़ के बिना तड़प रहा है, अतः हमने अधिवक्ता प्रतीक शरण से सम्पर्क किया उन्होंने निस्वार्थ रूप से कानूनी मदद को स्वयं तय्यार हुए. उन्होंने लीगल नोटिस तय्यार किया जिसमें कहा गया है के सिविल सर्जन अररिया को मेडिकल लापरवाही, मानसिक और शारीरिक यातना और अनुच्छेद 21 के तहत भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करने में विफलता का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता अबूजर आलम इतना कुछ होने के बाद भी उन्हें इलाज़ नहीं मिल रहा, फैसल जावेद यासीन ने कहा के हमने SDM अररिया को भी नोटिस की कॉपी दे दी है.

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