कम होने लगा कोरोना का कहर

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कम होने लगा कोरोना का कहर

एक दो राज्यों को छोड़ दें तो भारत में अब कोरोना का प्रकोप कम होने लगा है. देश के सैकड़ों अस्पतालों में बेड खाली पड़े हैं. लगभग हर अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध है. दवाइयां और इंजेक्शन की कालाबाज़ारी की खबरें भी कम हो गई हैं. बस थोड़ी कसर जो रह रई है वो कोरोना के टीके से जुड़ी है. कोरोना के टीके कम पड़ रहे हैं.

नई दिल्ली. एक दो राज्यों को छोड़ दें तो भारत के लगभग सभी प्रांतों से अब यह खबर आने लगी है कि कोरोना का प्रकोप वहां कम होने लगा है. अब देश के सैकड़ों अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में बेड खाली पड़े हुए हैं. लगभग हर अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध है. दवाइयां और इंजेक्शन की कालाबाज़ारी की खबरें भी लगभग कम हो गई हैं. बस थोड़ी कसर जो रह रई है वो कोरोना के टीके से जुड़ी है. कोरोना के टीके कम पड़ रहे हैं. कई प्रांतो ने 18 साल से बड़े लोगों का टीकाकरण कार्यक्रम रोक दिया है.

वैसे ,देश में 20 करोड़ लोगों को टीका लग चुका है. ये वह लोग है जो ज़्यादातर शहरी सुशिक्षित, संपन्न लोग हैं. अब भी ग्रामीण, गरीब, पिछड़े, अशिक्षित लोग टीके के इंतज़ार में हैं. हमारे देश भारत में तीन लाख से ज़्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. यह तो सरकारी आंकड़ा है. इस आंकड़े को पार कर लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं. पिछले 12 दिन में 50 हज़ार लोग महाप्रयाण कर गए हैं. इतने लोग तो आज़ाद भारत में कभी किसी महामारी से नहीं मरे हैं. किसी भी युद्ध में नहीं मरे हैं. मौत के इस मंजर ने सभी लोगों के दिल में भयानक ख़ौफ़ पैदा कर दिया है. जो लोग पहले के समय में मस्त मौला होकर घुमा फिरा करते थे, उनकी सारी ख़ुशियां काफ़ूर हो गई है.

जनजीवन रुक सा गया है. गलियों में पार्कों में लोगों का निकलना बंद हो चुका है. लगता है इंसान पर कहीं ना कहीं कोई बेरहम नज़र लग चुकी हैं. ये वाक़या सभी जगह व्याप्त है. ऑफ़िस कल कारख़ाने सभी जगह सिर्फ़ कामचलाऊ काम ही हो पा रहे हैं. घरों में भी उदासी और अकेलापन सूनापन व्याप्त है. सभी लोग अपने-अपने घरों में बंद हैं. जब हम दुनिया के दूसरे देशों को देखते हैं तो पता चलता है कि भारत में अब तक तीन लाख लोग मरे हैं तो अमेरिका में 6 लाख लोग मरे हैं. ब्राज़ील में 4-5 लाख लोग मौत के शिकार हुए हैं. जनसंख्या के हिसाब से अमेरिका के मुक़ाबले भारत तकरीबन 4 गुना बड़ा है और ब्राज़ील से 7 गुना बड़ा. अमेरिका में मेडिकल सुविधाएं और साफ़ सफ़ाई भी भारत से ज़्यादा है. हमारे यहां वहां के मुक़ाबले क्षति का ग्राफ़ थोड़ा ही ऊपर नीचे है.

हमारे यहां भी डॉक्टर और नर्स पूरी सेवा भावना देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा हमारे भोजन के मसाले, घरेलू नुस्ख़े, योग, आयुर्वेदिक दवाइयां चुपचाप काम कर रही हैं. ये सर्व सुलभ हैं. भारत के लोग यदि अफ़्रीका और एशिया के लगभग 100 देशों पर नज़र डालें तो उन्हें पता पड़ेगा कि वह कितने भाग्यशाली हैं. कोरोना के इस लड़ाई में भारत सरकार भी पूरी मुस्तैदी दिखा रही है. यदि तीसरी लहर आ भी गई तो वह जम कर मुक़ाबला करने के लिए तैयार है

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