कर्नाटक में दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन अभी से कुछ नेता अपने लिए मैदान तैयार कर रहे हैं

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कर्नाटक में दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन अभी से कुछ नेता अपने लिए मैदान तैयार कर रहे हैं

कर्नाटक में दो साल बाद विधानसभा (Karnataka Assembly Election 2023) के चुनाव होने हैं, लेकिन अभी से कुछ नेता अपने लिए मैदान तैयार कर रहे हैं. इसी कड़ी में पिछले दिनों कर्नाटक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने एक अंग्रेजी अखबार में ऐडवटोरियल (Advertorial) छपवाया था. ऐडवटोरियल एक तरह का विज्ञापन है, जहां खबरों की शक्ल में आर्टिकल और फीचर लिखवाए जाते हैं. आमतौर पर ऐडवटोरियल में कोई भी कंपनी या शख्स अपनी तारीफ में लेख लिखवाता है. शिवकुमार ने भी लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ऐडवटोरियल का सहारा लिया, लेकिन अब उनके इस कदम से कांग्रेस के अंदरखाने खलबली मच गई है.

इस दो पन्नों के विज्ञापन में शिवकुमार की जमकर तारीफ की गई. उन्हें ‘परिवर्तन का दूत’ कहा गया. उनकी तारीफ में कई सारे आर्टिकल और फीचर लिखे गए. इसके जरिए ये बताने की कोशिश की गई कि कोरोना महामारी के दौरान शिवकुमार ने लोगों की जान बचाने के लिए जमकर मेहनत की, लेकिन कांग्रेस के कई नेताओं को उनका ये प्रमोशन खटक रहा है. दबी जुबान में वो शिवकुमार के इस कदम पर नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता ने क्या कहा
द न्यूज़ मिनट से बातचीत करते हुए कांग्रेंस के कुछ सूत्रों ने कहा कि ये काम उस पीआर कंपनी ने किया है जो डीके शिवकुमार के लिए इमेज बिल्डिंग का काम कर रहे हैं. कांग्रेस प्रवक्ता लावण्या बल्लाल ने टीएनएम को बताया, ‘राजनेताओं और राजनीतिक दलों के लिए लोगों को उनके द्वारा किए गए काम के बारे में बताना सामान्य बात है.

पार्टी कैडर में जोश
लावण्या बल्लाल ने जोर देकर कहा कि विज्ञापनों को अलग नज़रिए से देखने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि सेवा एक राजनेता का धर्म है और शिवकुमार केवल यहीं काम कर रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि जुलाई 2020 में डीकेएस के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद पार्टी के कैडर में उत्साह काफी ज्यादा बढ़ गया है.

कई नेता नाराज़
उधर कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि डीके शिवकुमार खुद को अगले चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के दावेदार के तौर पर पेश करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी में काम के लिए उनकी प्रशंसा की जा रही है. अध्यक्ष के तौर पर कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने काफी अच्छा काम किया. लेकिन व्यक्तिगत जीत के रूप में इसके बारे में लिखना उनकी असुरक्षा को दर्शाता है. कई नेता इससे असहज हैं.

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