कोरोना पर बने सलाहकार ग्रुप के चेयरमैन ने दिया इस्तीफा, कहा था- मोदी जिद्दी हैं, वैज्ञानिकों की नहीं सुनते

0
386

देश के शीर्ष वायरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील ने कोरोना वायरस पर बने सलाहकार ग्रुप के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया. विकट महामारी के दौरान टॉप वायरोलॉजिस्ट का अपने पद से इस्तीफा देना सामान्य घटना नहीं है.

यह भी 70 साल में पहली बार है जब अहम पदों पर तमाम बैठे लोग निराश होकर अपना पद छोड़ रहे हैं. अरविंद पनगढ़िया से लेकर डॉ शाहिद जमील तक काफी लंबी लिस्ट है.

ऐसा इसलिए होता है कि किसी क्षेत्र का माहिर आदमी उसकी चुनौतियों से तो निपट सकता है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की मूर्खताओं से नहीं निपट सकता, इसलिए वह इस सरकार से दूरी बना लेता है.

डॉ जमील ने कुछ दिन पहले ही कोरोना महामारी से निपटने के सरकारी तौर तरीके पर सवाल उठाए थे. उन्होंने अपने इस्तीफे के कोई वजह बताने से इनकार कर दिया है.

विशेषज्ञों के इस ग्रुप ने मार्च के शुरू में ही चेताया था कि कोरोना का एक नया वैरिएंट देश में तेजी से फैल रहा है, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया. कोई उपाय तो दूर की बात है. सरकार की प्राथमिकता थी चुनाव. पूरी सरकार को एक हारी हुई बाजी में झोंक दिया गया.

हाल में डॉ जमील ने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखकर कहा था कि भारत में वैज्ञानिकों को ‘साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए जिद्दी प्रतिक्रिया’ का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने मोदी सरकार को भी सलाह दी थी कि उनको वैज्ञानिकों की बात सुननी चाहिए और पॉलिसी बनाने में जिद्दी रवैया छोड़ना चाहिए.

भारत में हर विशेषज्ञ का यही हाल होता है. सिर्फ गोबर और गोमूत्र एक्सपर्ट ही हैं जो अपनी जगह पर बने हैं. बाकी सबको जाना है. आपको उर्जित पटेल याद हैं? वे भी आरबीआई बोर्ड की अहम मीटिंग के पहले ही पद छोड़कर भाग गए थे.

उर्जित पटेल के बाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पद से विरल आचार्य ने भी इस्तीफा दे दिया. उसी दौरान अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद से इस्तीफा दे दिया है. सुरजीत भल्ला नोटबंदी और अन्य आर्थिक फैसलों के समर्थक थे. नोटबंदी के समर्थक तो उर्जित भी थे. इन दोनों का इस पद से इस्तीफा देना ऐतिहासिक घटना थी.

इसी तरह अरविंद सुब्रह्मण्यम ने भी मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. अरविंद पनगढ़िया ने नीति अयोग के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.

विरल आचार्य का इस्तीफा जून 2019 में हुआ था, उस समय तक मोदी सरकार में अहम पदों पर रहे आठ लोग इस्तीफा दे चुके थे. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के भी दो सदस्यों ने सरकार के फर्जीवाड़े से तंग आकर इस्तीफा दे दिया था.

सरकार की ओर से नियुक्त इतनी संख्या में विशेषज्ञ अपना पद छोड़ें, यह इससे पहले कभी नहीं हुआ. ऐसा इसलिए हो रहा है कि यह एक अक्षम और अयोग्य सरकार है जो जिद्दी और अपनी प्रवृत्ति से मूर्ख भी है.

हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का बयान देखें तो वे भी सरकार के रवैये से हैरान हैं. यह गोबरप्रिय सरकार देश का गुड़गोबर कर रही है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here