क्या यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेल विभाग और स्थानीय प्रशासन की नहीं है? मुहम्मद आरिफ अंसारी

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मुहम्मद आरिफ अंसारी

बिहार : तहरीक ए उर्दू (रजी०) के प्रवक्ता मो० आरिफ अंसारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया है कि 14 जुलाई को उनके बीवी बच्चे 03216 (पाटलिपुत्र मोतिहारी पैसेंजर) ट्रेन में पाटलिपुत्र स्टेशन से सीतामढ़ी जाने के लिए बैठे। यह लोग कुल पांच आदमी थे और दो बर्थ पर 6 आदमी बैठे थे। एक सीट पर तीन से ज़्यादा बैठने की गुंजाइश भी नहीं। गाड़ी जब हाजीपुर स्टेशन पर रुकी तो एक आदमी आया और उनके बेटे रियाज़ आरिफ (15 वर्ष) को सीट से उठ जाने को कहने लगा ताकि वह बैठ जाए। उनके बेटे ने उस से कहा कि वह इसपर पहले से बैठा है, क्यों उठे ? उसपर वह ज़बर्दस्ती करने लगा। सभों ने मिलकर उस का विरोध किया और उसे वहां बैठने नहीं दिया। इस पर वह शख्स आग बगुला हो गया और उन्हें यह कहते हुए धमकाने लगा कि “अभी बताता हूँ”। फिर वह कुछ लोगों को फ़ोन करके बुलाने लगा। यह देख कर उनके बच्चे घबरा गए और उनकी अहलिया (पत्नी) ने इन्हें पटना फ़ोन करके घटना की जानकारी दी। श्री अंसारी यह जानकर चिंचित होगए कि न जाने कौन सी घटना घाट जाए। उन्होंने रेल एस० पी० का संपर्क न० तलाश किया जो नहीं मिल सका। फिर वैशाली एस० पी० को फ़ोन करके मदद की गुहार लगाई लेकिन उन्हों ने साफ़ कह दिया कि यह रेलवे का मामला इस लिए वह कुछ नहीं कर सकते। फिर श्री अंसारी ने अपने एक रेल कर्मी मित्र से संपर्क करके इसकी जानकारी दी तो उन्हों ने हाजीपुर रेलवे पैसंजर सिक्योरिटी कंट्रोलरूम का संपर्क न० दिया जिसे उन्हों ने अपने बेटे को व्हाट्सप्प पर भेजा और उस पर संपर्क करके मदद मांगने की हिदायत की और खुद भी उस न० पर संपर्क करके सुरक्षा की गुहार लगाई। इसी क्रम में ट्रैन हाजी पुर से खुल कर मुजफ्फरपुर की तरफ जाने लगी और वह शख्स हालात की गंभीरताको भांपते हुए वहां से दूर हट कर गेट के पास चला गया लेकिन वहीँ से बच्चों को धमकाता भी रहा और बच्चे खौफ के मरे डरे सहमे उसकी धमकियां सहते रहे।

गाडी जैसे ही मुजफ्फरपुर स्टेशन पर पहुंची तो सात आठ पुलिस वालों को बोगी के गेट के सामने खड़ा देख कर वह शख्स डर के मरे भीड़ के साथ उतर भाग गया। पुलिस वालों ने बच्चों से मिल कर घटना की जानकारी ली तब तक तो वह भाग ही चूका था। पुलिस वाले उसे इधर उधर तलाश करते रहे लेकिन वह हाथ नहीं आया। एक पुलिस वाला गाड़ी खुलने तक बच्चों के पास मौजूद रहा। आखिरकार कुछ देर के बाद जब गाड़ी अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करने लगी तो वहां मौजूद पुलिस वाला आपना मोबाइल न० बच्चे को लिखवा कर यह कहते हुए उतर गया कि अगर आगे कोई दिक़्क़त हो तो मुझे कॉल कर लेना।

जब श्री अंसारी ने उक्त पुलिस वाले को कॉल करके एफ० आई० आर० का न० मालूम करने कि कोशिश की तो कहने लगा की वह तो दर्ज ही नहीं हुई, वजह पूछने पर कहने लगा कि वह तो बच्चों को चाहिए था कि रेल थाना जाकर एफ० आई० आर० दर्ज कराते। जब यह कहा गया कि एक तरफ बच्चे तो डरे हुए थे, दूसरी तरफ वह माँ बहन को ट्रेन में छोड़ कर थाना कैसे जाते? फिर डर यह भी था कि ट्रैन न खुल जाए। जवाब में पुलिस वाले ने कहा कि उनके पास ऐसी कोइ व्यवस्था नहीं है। जब उन से पूछा गया कि आगे रास्ते में सुरक्षा का क्या होगा ? कहने लगा कि चलती ट्रेन में सुरक्षा प्रदान करने कि कोई व्यवस्था नहीं है अलबत्ता उस ने बता कि अपना संपर्क न० देदिया है ज़रुरत पड़ने पर फ़ोन कर लेंगे ताकि अगले स्टेशन पर पुलिस बल को अलेर्ट कर दिया जाए।

खुदा खुदा करके बच्चे शाम 6 बजे शाम के बाद सीतामढ़ी स्टेशन पहुँच गए और ट्रेन से उतरकर कर घर चले गए। मगर इस घटना ने साबित कर दिया है कि रेल यात्रा के दौरान यात्रियों कि जान माल एवं इज़्ज़त आबरू सुरक्षित नहीं है। इस संबंध में एक रेल कर्मी ने बताया कि भारतीय रेलवे यात्रियों की हिफाज़त के लिए दो तरह की सिक्योरिटी प्रदान की करती है। रेलवे स्टेशन या उसके अहाते में किसी तरह की घटना या दुर्घटना से निपटने और यात्रिओं की सुरक्षा की ज़िम्मेवारी रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स (आर० पी० एफ०) की होती है और कुछ विशेष कार्य के लिए रेलवे स्टेशनों पर गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जी० आर० पी०) थाना भी होता है जहाँ राज्य पुलिस के जवान ताएनात किए जाते हैं। मगर यात्रियों को सिर्फ रेलवे स्टेशन या उसके अहाते में ही किसी तरह की कोई सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं चलती ट्रेन में नहीं। अलबत्ता कुछ विशेष ट्रेनों में सकॉट पार्टी ज़रूर चलती है बाकी ट्रेनों के मुसाफिर अल्लाह भरोसे अपना सफर तय करते हैं। इस दरम्यान चलती ट्रेनों मे सफर के दौरान उनके साथ कहीं भी कुछ हो सकता है और होता ही रहता है। अब सवाल पैदा होता है कि चलती ट्रेनों में यात्रिओं की सुरक्षा की ज़िम्मेवारी क्या रेलवे की नहीं है? जबकि गत छः सात वर्षों के दरम्यान यात्रियों (खास तौर से समुदाय विशेष) के साथ इस तरह की घटनाऐं बढ़ी हैं। इसी तरह सीट पर बैठने के मामले में 22 जून 2017 की रात दिल्ली से हरयाणा जाते हुए ट्रेन में सीट पर बैठने का लेकर झगडे में “हाफिज जुनैद” की मोब लिंचिंग करके दिल्ली से महज़ 20 किलोमीटर दूर असावटी के स्थान पर ट्रेन से धक्का दे दिया गया जहाँ उसकी मौत होगई थी। इसके बाद कई ऐसी घटनाऐं हुईं हैं जिन में ज़्यादातर इसी समुदाय को निशान बनाया गया है। इस तरह की घटनाओं के मदद-ए-नज़र यात्रियों की जान व माल एवं इज़्ज़त व आबरू कि सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

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