गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे यशवंत सिन्हा बोले- किसानों की लड़ाई में हम उनके साथ खड़े हैं

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भाजपा के पूर्व नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने मंगलवार को दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच कर आंदोलनरत किसानों से मुलाकात की और उनका हालचाल लिया।

यशवंत सिन्हा ने इस दौरान आंदोलन के अगुवा और भारतीय किसान यूनियन के नेता चौधरी राकेश टिकैत एवं युद्धवीर सिंह से भी मुलाकात भी। इस दौरान सिन्हा एवं किसान नेताओं के बीच लंबी चर्चा भी हुई।

इस मुलाकात के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय मोरचा का किसानों के आंदोलन का पूर्ण समर्थन है। हम आंदोलनकारी किसानों के साथ हैं।

हम अपने राष्ट्रीय मोर्चे को आने वाले दिनों में और भी ज्यादा मजबूत और सशक्त करेंगे और किसानों की लड़ाई में उनके साथ खड़े रहेंगे।

मालूम हो कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान यशवंत सिन्हा ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। खुद को टीएमसी का नेता बताते हुए कहा कि हमारी पार्टी का समर्थन हमेशा किसानों के साथ है।

सिन्हा ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय मोर्चा में राजनीतिक और गैर राजनीतिक दोनों तरह के लोग हैं। मैं उन लोगों की ओर से किसान भाईयों के बीच आया हूं।

यशवंत सिन्हा ने इस दौरान कहा कि हम आने वाले समय में राष्ट्रीय मोर्चा की बैठक में किसानों के मुद्दों पर चर्चा करेंगे और सड़कों पर उतरेंगे।

वहीं राकेश टिकैत ने कहा कि उनके आंदोलन का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है, हमारा आंदोलन पूर्ण रुप से गैर राजनीतिक है। जो लोग भी हमारा समर्थन करना चाहेंगे हम उन सभी का स्वागत करेंगे।

सिन्हा ने कहा कि यहां आने के बाद मेरी इन लोगों से जितनी भी बातें हुई हैं, उसके बाद मैं यहीं कह सकता हूं कि जब तक सरकार इन लोगों की मांगों को नहीं मानेगी, तब तक यहां आंदोलन चलता ही रहेगा।

इसके साथ ही राकेश टिकैत ने साफ कर दिया कि हम किसी भी राजनीतिक दल के साथ मंच साझा नहीं करेंगे और न ही अपने मंच पर किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों से प्रतिनिधित्व कराएंगे। विपक्ष को भी किसानों के मुद्दे पर अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।

मालूम हो कि केंद्र सरकार की तीनों विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन जारी है। कोरोना की दूसरी लहर के शांत पड़ने के बाद एक बार फिर से किसान आंदोलन की आंच तेज होती जा रही है।

दिल्ली बॉर्डर पर किसानो के जत्थे एक बार फिर से पहुंचने शुरु हो गए हैं। किसान पूरी तरह से आर या पार के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

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