जानिए यरूशलम शहर के बारे में, जो हिंसा में झुलस रहा है

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जानिए यरूशलम शहर के बारे में, जो हिंसा में झुलस रहा है

इस्राएल में पिछले कई दिन से तनाव बना हुआ है. यरूशलम के बीचोबीच स्थित अल अक्सा मस्जिद के पास दो पक्षों में भारी हिंसक झड़पें हो रही हैं. यरूशलम दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में एक है. इसकी अपनी कहानी है. यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीन धर्मों के लिए ये पवित्र शहर है. उनके पवित्र धार्मिक स्थल यहां हैं. लेकिन ये सबसे विवादित शहर भी है.

इजरायल की राजधानी घोषित किए गए शहर यरूशलम इन दिनों फिर हिंसा में घिरा हुआ है. इजरायली अफसरों द्वारा शेख जारा इलाके में रह रहे फिलीस्तीनियों को हटाने की कार्रवाई के बाद शुरू हुई. उसके बाद से शहर में हिंसा जारी है. हमास गाजा पट्टी से इजरायल पर रॉकेट दाग रहा है तो इजरायल  इसके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है. यरूशलम दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में है. तीन धर्मों के पवित्र स्थान इस शहर में हैं.अगर इजरायल इस पर अधिकार जताता है तो फिलीस्तीनियों ने भी इस शहर को राजधानी घोषित किया हुआ है

  इतिहास गवाह है कि येरुशलम प्राचीन यहूदी राज्य का केन्द्र और राजधानी रहा है. यहीं यहूदियों का परमपवित्र सोलोमन मन्दिर हुआ करता था, जिसे रोमनों ने नष्ट कर दिया. ये शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है. यहीं से हज़रत मुहम्मद जन्नत गए थे. राजधानी होने के अलावा यह एक महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल भी है. इस शहर में 158 गिरिजाघर तथा 73 मस्जिदें स्थित हैं. इन गिरिजाघरों और मस्जिदों के अलावा भी यहां देखने लायक बहुत कुछ है.

 इतिहास गवाह है कि येरुशलम प्राचीन यहूदी राज्य का केन्द्र और राजधानी रहा है. यहीं यहूदियों का परमपवित्र सोलोमन मन्दिर हुआ करता था, जिसे रोमनों ने नष्ट कर दिया. ये शहर ईसा मसीह की कर्मभूमि रहा है. यहीं से हज़रत मुहम्मद जन्नत गए थे. राजधानी होने के अलावा यह एक महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल भी है. इस शहर में 158 गिरिजाघर तथा 73 मस्जिदें स्थित हैं. इन गिरिजाघरों और मस्जिदों के अलावा भी यहां देखने लायक बहुत कुछ है

 इजरायलियों और फ़लस्तीनियों के बीच पवित्र शहर यरूशलम को लेकर विवाद बहुत पुराना और ग़हरा भी है. यरूशलम इसराइल-अरब तनाव में सबसे विवादित मुद्दा भी है. पैगंबर इब्राहीम को अपने इतिहास से जोड़ने वाले ये तीनों ही धर्म यरूशलम को अपना पवित्र स्थान मानते हैं. यही वजह है कि सदियों से मुसलमानों, यहूदियों और ईसाइयों के दिल में इस शहर का नाम बसता रहा है. हिब्रू भाषा में इसे येरूशलायीम और अरबी में अल-कुद्स के नाम से जाना जाता है.

इजरायलियों और फ़लस्तीनियों के बीच पवित्र शहर यरूशलम को लेकर विवाद बहुत पुराना और ग़हरा भी है. यरूशलम इसराइल-अरब तनाव में सबसे विवादित मुद्दा भी है. पैगंबर इब्राहीम को अपने इतिहास से जोड़ने वाले ये तीनों ही धर्म यरूशलम को अपना पवित्र स्थान मानते हैं. यही वजह है कि सदियों से मुसलमानों, यहूदियों और ईसाइयों के दिल में इस शहर का नाम बसता रहा है. हिब्रू भाषा में इसे येरूशलायीम और अरबी में अल-कुद्स के नाम से जाना जाता है.

 इस शहर को कई बार कब्ज़ाया गया है, ध्वस्त किया गया है और फिर से बसाया गया है. यही वजह है कि यहां की मिट्टी की हर परत में इतिहास की एक परत छुपी हुई है.आज यरूशलम अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच विभाजन और संघर्ष की वजह से सुर्ख़ियों में रहता है. लेकिन इस शहर का इतिहास इन्हीं लोगों को आपस में जोड़ता भी है.

इस शहर को कई बार कब्ज़ाया गया है, ध्वस्त किया गया है और फिर से बसाया गया है. यही वजह है कि यहां की मिट्टी की हर परत में इतिहास की एक परत छुपी हुई है.आज यरूशलम अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच विभाजन और संघर्ष की वजह से सुर्ख़ियों में रहता है. लेकिन इस शहर का इतिहास इन्हीं लोगों को आपस में जोड़ता भी है.

 ईसाई इलाक़े में द चर्च आफ़ द होली सेपल्कर है. ये दुनियाभर के ईसाइयों की आस्था का केंद्र है. ये जिस स्थान पर स्थित है वो ईसा मसीह की कहानी का केंद्रबिंदू है.यहीं ईसा मसीह की मौत हुई थी, उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था और यहीं से वो अवतरित हुए थे. दातर ईसाई परंपराओं के मुताबिक, ईसा मसीह को यहीं गोलगोथा पर सूली पर चढ़ाया गया था. इसे ही हिल ऑफ़ द केलवेरी कहा जाता है. ईसा मसीह का मक़बरा सेपल्कर के भीतर ही है और माना जाता है कि यहीं से वो अवतरित भी हुए थे. दुनियाभर के करोड़ों ईसाइयों के लिए ये धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र हैं. हर साल लाखों लोग ईसा मसीह के मक़बरे पर आकर प्रार्थना और पश्चाताप करते हैं.

ईसाई इलाक़े में द चर्च आफ़ द होली सेपल्कर है. ये दुनियाभर के ईसाइयों की आस्था का केंद्र है. ये जिस स्थान पर स्थित है वो ईसा मसीह की कहानी का केंद्रबिंदू है.यहीं ईसा मसीह की मौत हुई थी, उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था और यहीं से वो अवतरित हुए थे. दातर ईसाई परंपराओं के मुताबिक, ईसा मसीह को यहीं गोलगोथा पर सूली पर चढ़ाया गया था. इसे ही हिल ऑफ़ द केलवेरी कहा जाता है. ईसा मसीह का मक़बरा सेपल्कर के भीतर ही है और माना जाता है कि यहीं से वो अवतरित भी हुए थे. दुनियाभर के करोड़ों ईसाइयों के लिए ये धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र हैं. हर साल लाखों लोग ईसा मसीह के मक़बरे पर आकर प्रार्थना और पश्चाताप करते हैं.

 यहूदी इलाकडे में ही कोटेल या पश्चिमी दीवार है. ये वॉल ऑफ़ दा माउंट का बचा हिस्सा है. माना जाता है कि कभी यहूदियों का पवित्र मंदिर इसी स्थान पर था. इस पवित्र स्थल के भीतर ही द होली ऑफ़ द होलीज़ या यूहूदियों का सबसे पवित्र स्थान था.यहूदियों का विश्वास है कि यही वो स्थान है जहां से विश्व का निर्माण हुआ और यहीं पर पैगंबर इब्राहिम ने अपने बेटे इश्हाक की बलि देने की तैयारी की थी. कई यहूदियों का मानना है कि वास्वत में डोम ऑफ़ द रॉक ही होली ऑफ़ द होलीज़ है.आज पश्चिमी दीवार वो सबसे नज़दीक स्थान है जहां से यहूदी होली ऑफ़ द होलीज़ की अराधना कर सकते हैं.इसका प्रबंधन पश्चिमी दीवार के रब्बी करते हैं. यहां हर साल दुनियाभर से दसियों लाख यहूदी पहुंचते हैं और अपनी विरासत के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं.

यहूदी इलाकडे में ही कोटेल या पश्चिमी दीवार है. ये वॉल ऑफ़ दा माउंट का बचा हिस्सा है. माना जाता है कि कभी यहूदियों का पवित्र मंदिर इसी स्थान पर था. इस पवित्र स्थल के भीतर ही द होली ऑफ़ द होलीज़ या यूहूदियों का सबसे पवित्र स्थान था.यहूदियों का विश्वास है कि यही वो स्थान है जहां से विश्व का निर्माण हुआ और यहीं पर पैगंबर इब्राहिम ने अपने बेटे इश्हाक की बलि देने की तैयारी की थी. कई यहूदियों का मानना है कि वास्वत में डोम ऑफ़ द रॉक ही होली ऑफ़ द होलीज़ है.आज पश्चिमी दीवार वो सबसे नज़दीक स्थान है जहां से यहूदी होली ऑफ़ द होलीज़ की अराधना कर सकते हैं.इसका प्रबंधन पश्चिमी दीवार के रब्बी करते हैं. यहां हर साल दुनियाभर से दसियों लाख यहूदी पहुंचते हैं और अपनी विरासत के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं.

 शहर के केंद्र बिंदू में एक प्राचीन शहर है जिसो ओल्ड सिटी कहा जाता है. संकरी गलियों और ऐतिहासिक वास्तुकला की भूलभुलैया इसके चार इलाक़ों- ईसाई, इस्लामी, यहूदी और अर्मेनियाईं- को परिभाषित करती हैं. इसके चारों ओर एक किलेनुमा सुरक्षा दीवार है जिसके आसपास दुनिया के सबसे पवित्र स्थान स्थित हैं. हर इलाक़ें की अपनी आबादी है.ईसाइयों को दो इलाके हैं. क्योंकि अर्मेनियाई भी ईसाई ही होते हैं. चारों इलाक़ों में सबसे पुराना इलाक़ा अर्मेनियाइयों का ही है. ये दुनिया में अर्मेनियाइयों का सबसे प्राचीन केंद्र भी है.

शहर के केंद्र बिंदू में एक प्राचीन शहर है जिसो ओल्ड सिटी कहा जाता है. संकरी गलियों और ऐतिहासिक वास्तुकला की भूलभुलैया इसके चार इलाक़ों- ईसाई, इस्लामी, यहूदी और अर्मेनियाईं- को परिभाषित करती हैं. इसके चारों ओर एक किलेनुमा सुरक्षा दीवार है जिसके आसपास दुनिया के सबसे पवित्र स्थान स्थित हैं. हर इलाक़ें की अपनी आबादी है.ईसाइयों को दो इलाके हैं. क्योंकि अर्मेनियाई भी ईसाई ही होते हैं. चारों इलाक़ों में सबसे पुराना इलाक़ा अर्मेनियाइयों का ही है. ये दुनिया में अर्मेनियाइयों का सबसे प्राचीन केंद्र भी है

 अधिकतर इसराइली यरूशलम को अपनी अविभाजित राजधानी मानते हैं. इसराइल राष्ट्र की स्थापना 1948 में हुई थी. तब इसराइली संसद को शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थापित किया गया था. 1967 के युद्ध में इसराइल ने पूर्वी यरूशलम पर भी क़ब्ज़ा कर लिया था. प्राचीन शहर भी इसराइल के नियंत्रण में आ गया था. बाद में इसराइल ने इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली. यरूशलम पर इसराइल की पूर्ण संप्रभुता को कभी मान्यता नहीं मिली है और इसे लेकर इसराइल नेता अपनी खीज जाहिर करते रहे हैं. ज़ाहिर तौर पर फ़लस्तीनियों का नज़रिया इससे बिलकुल अलग है. वो पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी के रूप में मांगते हैं. इसराइल-फ़लस्तीन विवाद में यही शांति स्थापित करने का अंतरराष्ट्रीय फ़ॉर्मूला भी है.

अधिकतर इसराइली यरूशलम को अपनी अविभाजित राजधानी मानते हैं. इसराइल राष्ट्र की स्थापना 1948 में हुई थी. तब इसराइली संसद को शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थापित किया गया था. 1967 के युद्ध में इसराइल ने पूर्वी यरूशलम पर भी क़ब्ज़ा कर लिया था. प्राचीन शहर भी इसराइल के नियंत्रण में आ गया था. बाद में इसराइल ने इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली. यरूशलम पर इसराइल की पूर्ण संप्रभुता को कभी मान्यता नहीं मिली है और इसे लेकर इसराइल नेता अपनी खीज जाहिर करते रहे हैं. ज़ाहिर तौर पर फ़लस्तीनियों का नज़रिया इससे बिलकुल अलग है. वो पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी के रूप में मांगते हैं. इसराइल-फ़लस्तीन विवाद में यही शांति स्थापित करने का अंतरराष्ट्रीय फ़ॉर्मूला भी है

 फ़लस्तीनी और इसराइली विवाद के केंद्र में प्राचीन यरूशलम शहर ही है. यहां की स्थिति में बहुत मामूली बदलाव भी कई बार हिंसक तनाव और बड़े विवाद का रूप ले चुका है. यही वजह है कि यरूशलम में होने वाली हर घटना महत्वपूर्ण होती है. इस प्राचीन शहर में यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धर्म के सबसे पवित्र स्थल हैं. ये शहर सिर्फ़ धार्मिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है. 

फ़लस्तीनी और इसराइली विवाद के केंद्र में प्राचीन यरूशलम शहर ही है. यहां की स्थिति में बहुत मामूली बदलाव भी कई बार हिंसक तनाव और बड़े विवाद का रूप ले चुका है. यही वजह है कि यरूशलम में होने वाली हर घटना महत्वपूर्ण होती है. इस प्राचीन शहर में यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धर्म के सबसे पवित्र स्थल हैं. ये शहर सिर्फ़ धार्मिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है.

 मुसलमानों का इलाक़ा चारों इलाक़ों में सबसे बड़ा है और यहीं पर डोम ऑफ़ द रॉक और मस्जिद अल अक़्सा स्थित है. यह एक पठार पर स्थित है जिसे मुस्लिम हरम अल शरीफ़ या पवित्र स्थान कहते हैं. मस्जिद अल अक़्सा इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और इसका प्रबंधन एक इस्लामिक ट्रस्ट करती है जिसे वक़्फ़ कहते हैं.

मुसलमानों का इलाक़ा चारों इलाक़ों में सबसे बड़ा है और यहीं पर डोम ऑफ़ द रॉक और मस्जिद अल अक़्सा स्थित है. यह एक पठार पर स्थित है जिसे मुस्लिम हरम अल शरीफ़ या पवित्र स्थान कहते हैं. मस्जिद अल अक़्सा इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और इसका प्रबंधन एक इस्लामिक ट्रस्ट करती है जिसे वक़्फ़ कहते हैं

 मुसलमानों का विश्वास है कि पैगंबर मोहम्मद ने मक्का से यहां तक एक रात में यात्रा की थी और यहां पैगंबरों की आत्माओं के साथ चर्चा की थी. यहां से कुछ क़दम दूर ही डोम ऑफ़ द रॉक्स का पवित्र स्थल है यहीं पवित्र पत्थर भी है. मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद ने यहीं से जन्नत की यात्रा की थी. मुसलमान हर दिन हज़ारों की संख्या में इस पवित्र स्थल में आते हैं और प्रार्थना करते हैं. रमज़ान के महीने में जुमे के दिन ये तादाद बहुत ज़्यादा होती है.

मुसलमानों का विश्वास है कि पैगंबर मोहम्मद ने मक्का से यहां तक एक रात में यात्रा की थी और यहां पैगंबरों की आत्माओं के साथ चर्चा की थी. यहां से कुछ क़दम दूर ही डोम ऑफ़ द रॉक्स का पवित्र स्थल है यहीं पवित्र पत्थर भी है. मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद ने यहीं से जन्नत की यात्रा की थी. मुसलमान हर दिन हज़ारों की संख्या में इस पवित्र स्थल में आते हैं और प्रार्थना करते हैं. रमज़ान के महीने में जुमे के दिन ये तादाद बहुत ज़्यादा होती है.

 यरूशलम की एक तिहाई आबादी फ़लस्तीनी मूल की है जिनमें से कई के परिवार सदियों से यहां रहते आ रहे हैं. शहर के पूर्वी हिस्से में यहूदी बस्तियों का विस्तार भी विवाद का एक बड़ा का कारण है. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ये निर्माण अवैध हैं पर इसराइल इसे नकारता रहा है.

यरूशलम की एक तिहाई आबादी फ़लस्तीनी मूल की है जिनमें से कई के परिवार सदियों से यहां रहते आ रहे हैं. शहर के पूर्वी हिस्से में यहूदी बस्तियों का विस्तार भी विवाद का एक बड़ा का कारण है. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ये निर्माण अवैध हैं पर इसराइल इसे नकारता रहा है.

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