देश,कोरोना से ठीक होने के बाद भी है एसिडिटी या कम भूख की शिकायत तो क्या करें? गैस्ट्रोलॉजिस्ट ने दी खास सलाह

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देश,कोरोना से ठीक होने के बाद भी है एसिडिटी या कम भूख की शिकायत तो क्या करें? गैस्ट्रोलॉजिस्ट ने दी खास सलाह

नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमण (Coroanvirus In India) के मामले तो कम हो रहे हैं लेकिन जो भी इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं, उसमें से कुछ लोग ठीक होने के बाद भी लंबी बीमारी से जूझते हैं. डॉक्टरों ने इसे लॉन्ग कोविड (Long Covid) नाम दिया है. इस बाबत मणिपाल में एचसीएमसीटी के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एचओडी और सलाहकार –  डॉ कुणाल दास से News18.com ने खास बातचीत की. डॉक्टर दास ने कहा कि ‘कोविड -19 रेस्पायटरी सिस्टम के जरिए शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है. लगभग 60% रोगियों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण मौजूद होते हैं. दूसरी लहर में हमने देखा कि अधिकांश कोविड रोगियों में पेट के फ्लू जैसे मितली, उल्टी, पेट में दर्द और दस्त के लक्षण थे.’

लैंसेट की रिपोर्ट है कि हाइपोक्सिया के कारण  गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल  हो सकता है. ऐसी हालत में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होने के कारण शरीर का एक हिस्सा प्रभावित होता है. कम ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन गंभीर निमोनिया से संबंधित एक लक्षण है और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सीक्वेल से जुड़ा है. स्टडी में कहा गया है कि ‘हाइपोक्सिया ना केवल कोरोना के रोगियों में डिस्पेनिया के साथ होता है, बल्कि बिना डिस्पेनिया के कई रोगियों में भी होता है.’ सांस लेने में तकलीफ के लिए डिस्पेनिया एक मेडिकल टर्म है.

डिस्चार्ज किए गए 44% रोगियों में जीआई सीक्वेल

दास ने बताया कि मई 2021 में लैंसेट गैस्ट्रो हेपेटोल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, डिस्चार्ज किए गए 44% रोगियों में जीआई सीक्वेल था. दास ने कहा, ‘कोविड संक्रमण से उबरने के बाद दूसरे रोग का इलाज होता है. कोविड संक्रमित पाए जाने या संक्रमण के एक महीने के भीतर यह दूसरे रोगों का इलाज नहीं करा पाते.’
डॉ दास ने बताया कि कुछ कम सामान्य लक्षण जीआई सीक्वेल के लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे पेट में गड़बड़ी, डकार, उल्टी और पेट में दर्द. कुछ मामलों में लोगों को खूनी मल भी होता है और यदि ठीक होने के बाद लोगों में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

लैंसेट रिपोर्ट में बताया गया है कि जीआई सीक्वेल का असर कोविड निगेटिव होने के तीन महीने के भीतर कभी भी दिख सकता है. यह भी पाया गया कि जीआई सीक्वेल से प्रभावित रोगी अधिक बार डिस्पेनिया और मायलगिया से जुड़े होते हैं.

डॉ दास ने कहा कि नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त जीवनशैली तेजी से ठीक होने में मदद कर सकती है. उन्होंने कहा- ‘जीआई लक्षणों का उपचार एंटासिड्स, एंटी-इमेटिक्स और एंटी-डायरियल से हो सकता है. अधिकतर मामलों में एंटीबायोटिक दवाओं या किसी महंगी जांच की आवश्यकता नहीं होती है. एक अच्छा और पौष्टिक आहार लेना महत्वपूर्ण है. इससे रोगियों के ठीक होने में मदद मिलती है

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