नागरिकता क़ानून: विदेशी गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने के लिए केंद्र सरकार ने मांगे आवेदन।

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नागरिकता क़ानून: विदेशी गैर मुस्लिमों को नागरिकता देने के लिए केंद्र सरकार ने मांगे आवेदन।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी गैर मुस्लिमों से नागरिकता के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। सरकार ने 13 जिलों में पहले निवास कर रहे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, जैन व बौद्ध धर्म के इन लोगों से ये आवेदन मांगे हैं।

गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम 1955 और 2009 में कानून के तहत बनाए गए नियमों के तहत इस आदेश के तत्काल कार्यान्वयन के लिए अधिसूचना जारी की है. भले ही 2019 में सीएए (CAA) के तहत नियमों को अभी तक तैयार नहीं किया गया है।

केद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन मांगे हैं। केंद्र सरकार ने शुक्रवार (28 मई) को अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, जैन व बौद्ध और गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब के 13 जिलों में रहने वाले गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए आमंत्रित किया है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम 1955 और 2009 में कानून के तहत बनाए गए नियमों के तहत इस आदेश के तत्काल कार्यान्वयन के लिए अधिसूचना जारी की है। भले ही 2019 में सीएए (CAA) के तहत नियमों को अभी तक तैयार नहीं किया गया है।

दरअसल, जब 2019 में CAA कानून बनाया गया था, तो देश के विभिन्न हिस्सों में इसके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे. यहां तक ​​कि इन विरोधों के मद्देनजर 2020 की शुरुआत में दिल्ली में दंगे भी हुए थे. जिसके बाद ये कानून ठंडे बस्ते में चला गया।

CAA के अनुसार, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिम उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता दी जाएगी, जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए थे।

MHA के मुताबिक, जो लोग भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र हैं, वे शरणार्थी वर्तमान में गुजरात के मोरबी, राजकोट, पाटन और वडोदरा, छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बलौदाबाजार, राजस्थान के जालौर, उदयपुर, पाली, बाड़मेर और सिरोही, हरियाणा के फरीदाबाद और पंजाब के जालंधर में रह रहे हैं।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि नागरिकता कानून 1955 की धारा 16 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने कानून की धारा पांच के तहत यह कदम उठाया है। इसके अंतर्गत उपरोक्त राज्यों और जिलों में रह रहे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई लोगों को भारतीय नागरिक के तौर पर पंजीकृत करने के लिए निर्देश दिया गया है।

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