बंगाल में कांग्रेस साफ, तमिलनाडु में डीएमके की जूनियर पार्टनर, रामचंद्र गुहा की देश की सबसे पुरानी पार्टी को नसीहत

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बंगाल में कांग्रेस साफ, तमिलनाडु में डीएमके की जूनियर पार्टनर, रामचंद्र गुहा की देश की सबसे पुरानी पार्टी को नसीहत

नई दिल्ली. इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ने के हवाले से एक बार फिर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है. एनडीटीवी के लिए लिखे अपने ब्लॉग में गुहा कहते हैं कि पांचवीं पीढ़ी के वंशवादी कांग्रेस पार्टी को चला रहे हैं, जो भारतीय राष्ट्रवाद के इस बुजुर्ग इतिहासकार सहित कई लोगों को ठीक नहीं लगता है, जिन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय यह शोध करने में बिताया है कि कैसे स्वतंत्रता आंदोलन से निकली पार्टी ने एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और गैर-विभाजनकारी विचार को आगे बढ़ाया. हालांकि, कोई भी अपनी नापसंद को दबा सकता था, अगर इन राजवंशों का चुनाव जीतने का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा होता, जो नरेंद्र मोदी, अमित शाह और संघ परिवार द्वारा भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों को विफल करता. लेकिन ये लोग सत्ता हासिल करने या चुनाव जीतने में इतने नाकाम साबित हुए हैं कि भारतीय लोकतंत्र की वर्तमान दशा और दिशा से भयभीत बहुत सारे लोग देश की सबसे पुरानी पार्टी पर सोनिया गांधी और उनके बच्चों की विनाशकारी पकड़ से निराश हैं.

गुहा का कहना है कि राहुल और प्रियंका गांधी की राजनीतिक अक्षमता विधानसभा चुनावों में दिख गई है. बंगाल में कांग्रेस साफ हो गई है, तमिलनाडु में वह डीएमके की जूनियर पार्टनर है. असम में कांग्रेस लगातार दूसरी बार हारी है. सबसे चौंकाना वाला रिजल्ट केरल का रहा है, जहां राहुल गांधी के खुद कमान संभालने के बावजूद कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा. वे आगे लिखते हैं कि हिमंत बिस्वा सरमा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद का कांग्रेस छोड़कर जाना गांधी परिवार की राजनीतिक अक्षमता का दूसरा उदाहरण है. याद रखिए कि असम में कांग्रेस की हार के लिए सरमा जिम्मेदार हैं और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के हाथ से कुर्सी सिंधिया ने खींच ली.

उन्होंने लिखा, सोनिया गांधी कांग्रेस पर पारिवारिक नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध लगती हैं, ऐसे में अपने बेटे की तुलना में अधिक दोषी हैं. कुछ दोष उनके वरिष्ठतम चाटुकारों का है. जी-23 के नेताओं ने जब पार्टी के भीतर बहस को उकसाया तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पार्टी के हितों के बजाय एक परिवार की रक्षा को चुना. राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने राजीव और राहुल गांधी की एक तस्वीर को कैप्शन दिया- “हमारे भविष्य का राजा”, जोकि एक तरीके से बहुत बुरा संकेत है. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील को पता होना चाहिए कि लोकतंत्र में राजा नहीं होते, लेकिन उनके कैप्शन से कांग्रेस नेताओं की चमचागिरी का पता चलता है. यह संस्कृति उस मंडली पर टिकी हुई जो राहुल गांधी की रक्षा करती है और उन्हें सलाह देती है, जो चीयरलीडर्स से बनी है, जिनका अपना कोई राजनीतिक आधार नहीं है और राजनीतिक बुद्धिमानी भी नहीं है.

गांधी परिवार की अगुवाई में कांग्रेस का पतन हर उस भारतीय के लिए मायने रखती है, जो हिंदुत्व की घृणित और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ है, जो लोकतंत्र के सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत ताने बाने की बहाली चाहता है, जिसे तबाह कर दिया गया है. मौजूदा सत्ताधारियों के मुकाबले राहुल गांधी ज्यादा उदार हैं, लेकिन राजनीतिक फोकस और निर्णय की अक्षमता के साथ प्रभावी रूप से हिंदी ना बोल पाना उनकी कमजोरी है. इसके साथ ही पांचवीं पीढ़ी का वंशवादी होना भी उनके लिए एक बड़ी समस्या है.
जो लोग 2024 में केंद्र की सत्ता में बदलाव चाहते हैं, उन्हें समझना होगा कि विपक्ष की सबसे कमजोर कड़ी कांग्रेस है. टीएमसी, डीएमके, सीपीआईएम और आरजेडी के पास राजनीतिक महत्वाकांक्षा और एनर्जी है, लेकिन कांग्रेस की लीडरशिप के पास ऐसा कुछ नहीं है. राहुल गांधी अभी तक फेल साबित हुए हैं और क्षत्रपों के बीच उनका सम्मान भी नहीं है, जो एक फेडरल या यूनाइटेड फ्रंट के लिए महत्वपूर्ण है.

मोदी सरकार द्वारा महामारी और अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन ने पूरे देश में निराशा का माहौल भर दिया है. हालात इतने खराब है कि सुप्रीम कोर्ट और हिंदी मीडिया के एक हिस्से ने सरकार को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है. इस बात पर भरोसा करना मुश्किल है कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को दुरूस्त कर देगी और लोगों की आजीविका और आय के स्त्रोत फिर से बहाल हो पाएंगे. 2024 का चुनाव जैसे जैसे नजदीक आता जाएगा, सत्ताधारी दल हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ाएगा, साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली की तर्ज पर चुनावी भिड़ंत को भी. सत्ताधारी दल के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं होगा कि राहुल गांधी को लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी के पूर्व निर्धारित विकल्प के रूप में पेश किया रहा है, बीजेपी का विरोध करने वालों को इस स्थिति से बचना होगा.

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