बिहार,राजनीति,चिराग पासवान ने लिखा भावुक खत,बोले- मुट्ठी भर लोग हमारी पार्टी नहीं छीन सकते-LJP हमारी ही रहेगी

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बिहार की राजनीति लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और दिवंगत नेता राम विलास पासवान के बेटे चिराग पासवान के इर्द-गिर्द घूम रही है।

चाचा पशुपति और भतीजे चिराग पासवान के बीच छिड़े राजनैतिक मतभेद के बीच ही चिराग पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुये एक बेहद भावुक पत्र लिखा है।

पत्र में चिराग ने अपने कार्यकर्ताओं को पार्टी संस्थापक राम विलास पासवान के दिखाए गये मार्ग को याद रखने की बात की है। साथ ही जनता दल यूनाइटेड पर ढेर आरोप लगाए हैं।

2005 चुनावों के बाद लोजपा के 29 विधायक तोड़ने की, 2020 में अपने एक विधायक तोड़ने की बात स्पष्ट तौर पर लिखी। चिराग ने जदयू पर “बाँटो और राज करो” की राजनीति करने का आरोप भी लगाया ।

चिराग ने आगे यहाँ तक लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके पिता और पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान के राजनैतिक कार्यकाल में कई बार उनकी हत्या कराने का प्रयास किया है।

लोजपा के युवा नेता ने आगे कहा कि हमारे नेता को अपमानित करने की पराकाष्ठा तब हुई जब राज्यसभा के दौरान नीतीश कुमार ने हमारे नेता को मजबूर किया कि वो उनके पास जाए और उनसे मदद मांगे जबकि सीटों के बंटवारे के लिए पहले ही गठबंधन में यह तय हो गया था और इसकी घोषणा बीजेपी के अध्यक्ष द्वरा सार्वजनिक तौर पर की गई थी।

चिराग पासवान ने लिखा, ‘मुझे ताज्जुब होता है कि पार्टी से निष्कासित सांसद कैसे एक ऐसे व्यक्ति के साथ खड़े हो सकते है, जिन्होंने हमेशा हमारे नेता राम विलास पासवान जी को ही नहीं बल्कि बिहार की जनता को धोखा देने का काम किया।

नीतीश कुमार को बर्दाश्त ही नहीं कर सकते कि दलित राजनीति में आगे बढ़े फिर चाहे वो रामविलास पासवान हो या फिर चिराग पासवान, मेरी पार्टी और मेरे परिवार को तोड़ मुझे खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है पर मैं रामविलास पासवान का बेटा हूं , एक शेर का बेटा जो कभी किसी परिस्थिति से ना तो डरता है और ना घबराता है।’

अपने टूटते परिवार के बारे में चिराग ने लिखा कि उन्हें परिवार के टूटने का दुख है। उनके पिता ने हमेशा पार्टी के साथ साथ अपने भाइयों को भी आगे बढ़ाने का काम किया है।

राम विलास पासवान को गये 9 महीने भी नहींं हुये हैं लेकिन अपनी स्वार्थी महत्वाकांक्षाओं के लिये पशुपति पारस ने पार्टी की विचारधारा को चकनाचूर कर दिया है।

चिराग पासवान ने अंत में अपने कार्यकर्ताओं के मनोबल को बरकरार रखने के लिए लिखा, ‘साथियों आने वाले समय में हम सबको एक लंबी और राजनीतिक और सैद्धांतिक लड़ाई लड़नी है। ये लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के अस्तित्व की नहीं बल्कि रामविलास पासवान के विचारधारा को बचाने की है।

मैं मजबूती से हर राजनीतिक और कानून लड़ाई लड़ने को तैयार हूं और अपने अगले पत्र में पार्टी के संविधान और सिद्धांतों की जानकारी आप सबके साथ साझा करूंगा ताकि आप सबको भी ये विश्वास रहे की हम लोग कानूनी तौर पर कितने मजबूत है और पार्टी से निलंबित मुट्ठी भर लोग हम से हमारी पार्टी नहीं छीन सकते। मैं आपसे वादा करता हूं कि लोक जनशक्ति पार्टी हमारी थी और हमारी रहेगी।”

चिराग पासवान के इस पत्र के सामने आने के बाद अब देखना है कि उनके विरोधी चाचा पशुपति पारस और बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ऊपर लगे संगीन आरोपों का जवाब कैसे देंगे

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