बिहार : बंद कमरे में तेजप्रताप और मांझी की 30 मिनट मुलाकात, फिर लालू को फोन, बढ़ी सियासी हलचल

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बिहार : बंद कमरे में तेजप्रताप और मांझी की 30 मिनट मुलाकात, फिर लालू को फोन, बढ़ी सियासी हलचल

पटना. बिहार की सियासत (Bihar Politics) में कब कौन सा मोहरा कौन सी चाल चले इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है. बिहार की सियासत में इन दिनों शतरंज के मोहरों की तरह ही सियासत चल रही है. बिहार की सियासत के बीच आज सियासी पारा उस समय तेज हो गया जब लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) अचानक जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के आवास उनसे मिलने पहुंचे. जीतन राम मांझी आवास पर बंद कमरों में तेज प्रताप के साथ लगभग आधे घंटे मुलाकात हुई. इस मुलाकात में जीता राम मांझी और तेज प्रताप यादव के अलावा सभी को बाहर रहने की हिदायत दी गई थी. बंद कमरे में चल रहे बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने जीतन राम मांझी की लालू प्रसाद यादव से टेलीफोन पर बात भी कराई. लालू और मांझी के टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है. हालांकि तेजप्रताप यादव ने कहा कि मेरे अंकल हैं. इनसे मिलने हमेशा आता हूं. आज गुजर रहा था तो मिलने का गया. मांझी ने भी इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं लगाने की बात कही.

जीतन राम मांझी और तेजप्रताप के बीच चले मुलाकात के बाद जीतन राम मांझी ने बताया कि तेज प्रताप ने एक नए गैर राजनीतिक संगठन बनाने का ऑफर रखा है जिसमें जुड़ने का आग्रह किया है. जीतन राम मांझी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस संगठन में सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर साथ आने का आग्रह किया है ताकि नए जनरेशन को राजनीति के तौर तरीके और मर्यादा समझा जा सके. जीतन राम मांझी ने भी तेज प्रताप के ऑफर को स्वीकारते हुए कहा कि अगर ऐसा होता है तो मैं भी साथ में जुड़ने के लिए तैयार हूं.

लालू यादव से बातचीत के कई मायने

तेज प्रताप यादव ने जीतन राम मांझी की टेलीफोन से लालू प्रसाद यादव से बात कराई. इस बातचीत की जानकारी जीतन राम मांझी ने खुद देते हुए कहा कि लगभग 10 मिनट तक लालू प्रसाद यादव से मुलाकात हुई जिसमें उन्होंने लालू प्रसाद यादव को जन्मदिन की बधाई और दीर्घायु रहने की कामना की. जीतन राम मांझी ने इस मुलाकात के बारे में बताते हुए कहा कि इसका कोई राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए क्योंकि यह मुलाकात विशुद्ध रूप से पारिवारिक मुलाकात था और लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ मुलाकात भर थी. राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह मुलाकात के कई मायने लगाए जा रहे हैं. जिस प्रकार से जीतन राम मांझी पिछले कुछ दिनों में बयानबाजी की है वो कई बातों को जन्म देता है. कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने इस मुलाकात पर खुशी जताते हुए कहा कि मांझी की कांग्रेस और आरजेडी से बेहतर संबंध पहले से रहे है. इस मुलाकात के सियासी मायने है. आने वाले दिनों में खुशखबरी मिल सकती है.
मांझी लगातार उठाते रहे है सवाल

जीतन राम मांझी पिछले कुछ दिनों में एनडीए में कई सवाल उठाते रहे है. बांका बम ब्लास्ट में जब बीजेपी ने मदरसा पर सवालिया निशान खड़ा किया तो मांझी ने आगे आकर जवाबी हमला करते हुए कहा कि गरीबों के बच्चे को नक्सली और आतंकवादी बताया जाता है. वहीं एनडीए में एकबार फिर कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की मांग रखकर नई चर्चा छेड़ दी. जीतन राम मांझी में मुकेश साहनी से मुलाकात कर भी हंगामा खड़ा कर दिया था. हालांकि मांझी फिलहाल किसी भी बदलाव से इनकार कर रहे हैं, पर सियासत किस करवट बैठेगा देखना दिलचस्प होगा

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