बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण के 7336 नए मामले, एक्टिव मरीज 82 हजार से ज्यादा

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बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण के 7336 नए मामले, एक्टिव मरीज 82 हजार से ज्यादा

Bihar Coronavirus Cases: बिहार में एक दिन में 14340 व्यक्ति कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद स्वस्थ हो गए, रिकवरी रेट 86.63 प्रतिशत

पटना: 

Bihar Coronavirus Update: बिहार में शनिवार को शाम 4 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 7336 नए मामले सामने आए. इसके साथ राज्य में अब एक्टिव मरीजों की संख्या 82486 हो गई है. इस एक दिन में 14340 व्यक्ति स्वस्थ हो गए. अब तक स्वस्थ हुए लोगों की कुल संख्या 558755 हो गई है. बिहार में कोरोना मरीजों का रिकवरी प्रतिशत 86.63 है. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी है.

बिहार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक शनिवार को समाप्त 24 घंटे में कुल 110172 सैम्पलों की जांच हुई है. प्रदेश में अब तक कुल 5,58,785 मरीज ठीक हुए हैं. वर्तमान में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 82,486 है.

बिहार सरकार का दावा है कि राज्य में कोरोना के मामले कम हो रहे हैं क्योंकि पॉज़िटिव लोगों की संख्या में कमी आ रही है. वहीं एनडीटीवी इंडिया की टीम ने कैमूर जिले के एक गांव का दौरा किया तो वहां लोगों ने जो आपबीती सुनाई उससे साबित हो रहा है कि ग्रामीण इलाक़ों की स्थिति बदतर है.

कैमूर के बामहौर ख़ास गांव के लोग दुखी हैं. गांव के लोग बताते हैं कि पिछले 25 दिन में 34 लोगों की मौत हुई है.
लोगों का कहना है कि शुरुआत में कोरोना के लक्षण पर टाइफ़ाइड की दवा दी जा रही है. ग्रामीण अशोक कुमार चौधरी ने महामारी में अपनी चाची को खो दिया. उन्होंने बताया कि ”पहले बुखार आया ..फिर गले में कफ़ हुआ और फिर मौत हो गई. कोरोना का टेस्ट हुआ, लेकिन काग़ज़ नहीं लिया.” आलोक कुमार सिंह के पिता को कोरोना से मौत हो गई. उन्होंने बताया कि ‘’दूसरी खुराक ली और बुखार आया, हॉर्ट के मरीज थे और शुगर थी. सरकारी हॉस्पिटल में गए और उन्होंने इंजेक्शन लगा दिया..और मौत हो गई.”

गांव में कामताकांत पांडेय जैसे कई लोग मिले जिनकी कहानी बताती है कि लोगों के इलाज में जमकर लापरवाही हो रही है. कामताकांत पांडेय ने कहा कि ‘पहले मलेरिया, टाइफायड.. तब कोरोना हुआ था. फिर ऑक्सीजन 36 घंटे लगी रही

गांवों में बीमारों की संख्या बढ़ती जा रही है. जबकि सरकार कह रही है कि फ़िलहाल मामलों में कमी आ रही है, और वह अपनी पीठ थपथपाने में लगी है. हकीकत में गांवों में स्थिति बदतर हो रही है

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