बूढे़-बच्चों तक को बेरहमी से पीटा, महिलाओं की आबरू लूटने की भी हुई कोशिश: पूर्णिया कांड पीड़ित मह‍िला की आपबीती

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बूढे़-बच्चों तक को बेरहमी से पीटा, महिलाओं की आबरू लूटने की भी हुई कोशिश: पूर्णिया कांड पीड़ित मह‍िला की आपबीती

Bihar News: बिहार के पूर्णिया में महादल‍ित बस्‍ती के 13 घरों को पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई. एक पूर्व चौकीदार नेवालाल की पीटकर हत्या कर दी गई और पीड़ितों का कहना है क‍ि इन लोगों ने बहू-बेटियों की इज्जत तक लूटने की कोशिश की. आज भी इन पीड़ित महादलितों के जेहन में वो खौफनाक काली रात की भवायह तस्वीर यादकर सिहर उठता है.

ब‍िहार के पूर्णिया के बायसी थाना के मझुआ कांड के बाद अब राजनीति तेज हो गई है. कई राजनीतिक दल के लोग वहां दौरा भी कर रहे हैं, लेकिन सवाल उठता है कि इससे पहले भी यहां कई ऐसी घटनाएं हुई है. चाहे वह निखरैल हत्याकांड हो या रुपसपुर खगहा, दरनिया कोठी घाट की घटना हो या कसमरा कांड. हर घटना में महादलित ही मारे गये है. वहीं हिन्दूवादी संगठन के लोग इस घटना के पीछे सोची समझी साजिश बता रहे हैं, तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम इसे जमीन विवाद और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा बता रही है. आखिर क्या है इन सबके बीच आईये देखते है पूर्णिया से न्‍यूज 18 की खास रिपोर्ट

पूर्णिया के बायसी थाना के मझुआ गांव में 19 मई की स्याह काली रात में एक समुदाय विशेष के सैकड़ों लोगों ने महादल‍ित बस्‍ती के 13 घरों को पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी. एक पूर्व चौकीदार नेवालाल की पीटकर हत्या कर दी गई. इससे भी मन नहीं भरा तो दरिन्दों ने बहू-बेटियों की इज्जत तक लूटने की कोशिश की. आज भी इन पीड़ित महादलितों के जेहन में वो खौफनाक काली रात की भवायह तस्वीर यादकर सिहर उठता है. पीड़िता धनवंती देवी और पीड़ित रमन लाल हरिजन बताते हैं कि किस तरह उस रात को उनके घरों को आग लगाकर सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उनलोगों पर अमानवीय अत्याचार किया था. लोगों ने गर्भवती महिला, बूढे़ और बच्चों तक को बेरहमी से पीटा और महिलाओं के इज्जत आबरू से खिलवाड़ करने की कोशिश की.

वहीं हिन्दुवादी संगठन इस घटना के पीछे बड़ी साजिश बता रहे हैं. आरएसएस धर्म जागरण के प्रान्त प्रशासनिक प्रमुख राजीव श्रीवास्तव की माने तो इस इलाके में काफी दिनों से बड़ी साजिश रची जा रही है. कहीं न कहीं महादलितों और हिन्दुओं को भगाकर बिग बांग्‍लादेश का कॉन्‍सेप्‍ट रचा जा रहा है. इसके लिये राष्ट्रीय एजेन्सियों को ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी दूसरे समुदाय के लोगों ने डगरुआ के निखरैल में 1998 ईस्वी में 9 आदिवासियों को जिन्दा जलाकर मार दिया गया था. इस तरह की कई घटनाएं इस इलाके में लगातार हो रही है. वहीं हिन्दू जागरन मंच के प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य समरेन्द्र भारद्वाज का कहना है क‍ि जहां भी हिन्दू अल्पसंख्याक है उनके उपर हमला कर उन्हें पलायन करने के लिए विवश किया जा रहा है.

वहीं एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष व अमौर के विधायक अख्तरुल ईमाम ने कहा कि यह पूरी तरह जमीन विवाद है. प्रशासन की विफलता के कारण इस तरह की घटना हुई है. इसको कुछ लोग अलग रंग देना चाहते हैं. उन्होंने चैलेंज देते हुए कहा कि इस इलाके में उनके जानकारी में कहीं रोहिंग्या मुसलमान नहीं है. अगर है तो प्रशासन क्या कर रहा है? बायसी के एआईएमआईएम के विधायक सैय्यद रुकनुद्दीन ने कहा कि प्रशासन घटना के बाद से लगातार कार्रवाई कर रही है. घटना के पीछे कुछ अपराधियों का हाथ है. वहीं एसपी दयाशंकर ने बताया कि अबतक पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है. अन्य की गिरफ्तारी के लिये प्रयास किया जा रहा है.
क्‍या है मामाला

19 मई को पूर्णिया के मझुवा में महादलितों के साथ अत्याचार की ये पहले घटना नहीं है. अगर पूर्णिया जिला के बड़े घटनाओं की चर्चा करें तो सबसे अधिक चर्चित रहे निखरैल कांड था. डगरुआ के निखरैल में 15 दिसम्बर 1998 को मोहमदिया स्टेट के लोगों ने 9 आदिवासियों को जिन्दा जलाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी थी. घटना के पीछे जमीन विवाद बताया जा रहा है. वहीं 22 नवम्बर 1971 ईस्वी को धमदाहा के रुपसपुर खगहा में 14 आदिवासियों की गोली मारकर और तलवार से काटकर निर्मम हत्या कर दी गई थी. 2002 ईस्वी में जमीन विवाद में कसमरा में 3 लोगों की हत्या कर दी गई थी. वहीं 2009 ईस्वी में के नगर के डरमिया घाट में चार आदिवासियों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इसके अलावे भी कई छोटी बड़ी घटनाएं है जो इस ईलाके में अक्सर होती रहती है . आखिर इन सब घटनाओं के पीछे जिम्मेवार कौन है

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