भारत में कोरोना की दूसरी लहर अब कम हो गया है. हालांकि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने चिंता बढ़ा दी है

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भारत में कोरोना की दूसरी लहर अब कम हो गया है. हालांकि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने चिंता बढ़ा दी है

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप अब कम हो गया है. हालांकि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञ लगातार कह रहे हैं कि कोरोना के प्रकोप से बचना है तो वैक्सीनेशन जल्द से जल्द करवाएं. जो लोग वैक्सीनेशन से बचने के बहाने खोज रहे हैं उन्हें संक्रामक रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है. उनका कहना है कि जो लोग वैक्सीन नहीं लेंगे उन्हें अन्य के मुकाबले कोरोना के अन्य वैरिएंट से खतरा ज्यादा है. सीएनएन के अनुसार, एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ ने कहा है कि असंक्रमित व्यक्ति न केवल अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डालेंगे, बल्कि कोरोना वायरस के संभावित वैरिएंट के ‘कारखाने’ की तरह हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में वैक्सीन की उपलब्धता की कमी के साथ-साथ दुनिया भर में वैक्सीन की हिचकिचाहट, वायरस के नए वैरिएंट और घातक म्यूटेशन को दबाने में एक बाधा की तरह का काम कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में संक्रामक रोगों के विभाग के प्रोफेसर डॉ विलियम शेफ़नर ने कहा कि असंक्रमित लोगों की संख्या जितनी अधिक होगी, वायरस के गुणा करने के उतने ही ज्यादा चांस होंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी दी चेतावनी
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के चीफ टेड्रोस अदहानोम गेब्रेयेसस ने भी कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को लेकर चेतावनी दी है. उन्होंने आगाह करते हुए बताया है कि कि दुनिया कोविड-19 महामारी के बेहद ‘खतरनाक दौर’ में है. कोरोना के डेल्टा जैसे वेरिएंट ज्यादा संक्रामक हैं और वक्तके साथ लगातार बदल रहे हैं. टेड्रोस ने कहा कि करीब-करीब दुनिया के 100 देशों में फैल चुका डेल्टा वेरिएंट आने वालों दिनों में सबसे तेजी से फैलने वाला वेरिएंट बन जाएगाऔर इस तरह ये दुनिया में कोरोना का सबसे ज्यादा संक्रामक वेरिएंट होगा.
‘डेल्टा जैसे स्वरूप अधिक संक्रामक है और ये कई देशों में फैल रहा है. इसी के साथ हम इस महामारी के बहुत खतरनाक दौर में हैं. कोई भी देश अभी तक खतरे से बाहर नहीं है. डेल्टा स्वरूप खतरनाक है और ये वक्त के साथ और बदल रहा है, जिस पर लगातार नजर रखने की जरूरत है. जिन देशों की कम आबादी को टीके लगे हैं, वहां के अस्पतालों मेंफिर से मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है.

सितंबर तक कम से कम 10 प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन
WHO चीफ ने दुनियाभर के नेताओं से अनुरोध किया कि वे एक साथ मिलकर ये सुनिश्चित करें कि इस सितंबर के अंत तक सभी देशों के कम से कम 10 प्रतिशत लोगों को टीका लग जाएऔर अगले साल इस समय तक हर देश की 70 प्रतिशत आबादी का वैक्सीनेशन हो जाए.

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