महाराष्ट्र, शिवसेना के शाखा प्रमुख से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पॉलिटिक्स के दिग्गज हैं नारायण राणे

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महाराष्ट्र, शिवसेना के शाखा प्रमुख से केंद्रीय मंत्री तक का सफर पॉलिटिक्स के दिग्गज हैं नारायण राणे

नई दिल्ली. महाराष्ट्र के कद्दावर नेता नारायण राणे को भी मोदी मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल में जगह दी गई है. माना जा रहा है कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है. जमीनी स्तर से राजनीति की शुरुआत करने वाले नारायण राणे पहले शिवसेना, फिर कांग्रेस में रहने के बाद अपनी पार्टी भी बना चुके हैं, जिसे उन्होंने बीजेपी में मिला दिया था. 2019 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की थी. अभी नारायण राणे राज्यसभा सांसद हैं.

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम नारायण राणे के दो बेटे नीलेश और नितेश भी बीजेपी में हैं. नारायण राणे केवल साढ़े सात महीने ही सीएम रहे, लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में वो बड़ा कद और दखल रखते हैं. यही वजह है कि उनकी पार्टी के बीजेपी के विलय में मौजूद रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि नारायण राणे की वजह से बीजेपी को फायदा पहुंचेगा.

युवाओं के बीच लोकप्रिय थे नारायण राणे
तकरीबन तीन दशक की सियासत में नारायण राणे ने बड़ी तेजी से करवटें बदली हैं. नारायण राणे का जन्म 10 अप्रैल 1952 को एक सामान्य परिवार में हुआ. साल 1968 में केवल 16 साल की उम्र में ही नारायण राणे युवाओं को शिवसेना से जोड़ने में जुट गए. शिवसेना में शामिल होने के बाद नारायण राणे की लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती चली गई. युवाओं के बीच नारायण राणे की ख्याति को देखकर शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे भी प्रभावित हुए. उनकी संगठन की क्षमता ने उन्हें जल्द ही चेंबूर में शिवसेना का शाखा प्रमुख बना दिया.

साल 1990 में पहली बार बने विधायक
राणे के युवा जोश और नेतृत्व क्षमता ने उनके सियासी कद को बड़ी तेजी से ऊंचा उठाने का काम किया. साल 1985 से 1990 तक राणे शिवसेना के कारपोरेटर रहे. साल 1990 में वो पहली दफा शिवसेना की पार्टी से विधायक बने. इसके साथ ही वो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बने.

छगन भुजबल का शिवसेना छोड़ना रहा टर्निंग पाइंट
लेकिन राणे के सियासी करियर ने रफ्तार तब पकड़ी जब छगन भुजबल ने शिवसेना छोड़ दी. साल 1996 में शिवसेना-बीजेपी सरकार में नारायण राणे राजस्व मंत्री बने. इसके बाद मनोहर जोशी के मुख्यमंत्री पद से हटने पर राणे को सीएम की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला. 1 फरवरी 1999 को शिवसेना-बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार में नारायण राणे मुख्यमंत्री बने. हालांकि सीएम की कुर्सी का सुख थोड़े समय तक ही रहा.

उद्धव ठाकरे की ताजपोशी पर राणे ने की बगावत
इसके बाद शिवसेना से राणे के मोहभंग होने की शुरुआत हुई. उद्धव ठाकरे के शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष के ऐलान होते ही नारायण राणे के सुरों में बगावत हावी होने लगी. राणे ने उद्धव की प्रशासनिक योग्यता और नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए जिसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. शिवसेना छोड़ने के बाद नारायण राणे 3 जुलाई 2005 में कांग्रेस में शामिल हो गए.

शिवसेना से बगावत करने के बावजूद राणे विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने. कांग्रेस सरकार में भी राणे राज्य के राजस्व मंत्री बने. हालांकि महाराष्ट्र की पृथ्वीराज सरकार की भी आलोचना कर नारायण राणे सुर्खियां बटोर चुके हैं.

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