मोदी सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार-जब वैक्सीन नहीं है तो मोबाइल में कॉलरट्यून क्यों लगा दिए हो?

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देश में फैली कोरोना महामारी में 18 से 45 साल के लोगों को भी वैक्सीन लगाने की अनुमति दे दी गई है। लेकिन एक सच ये भी है कि भारत में वैक्सीन की किल्लत चल रही है।

कई राज्यों में वैक्सीन का पहला डोज ले चुके लोगों को दूसरा डोज नहीं मिल रहा है। ऐसे में 18 से 45 साल के लोगों को वैक्सीन लगवाने के सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना वैक्सीन को लेकर मोबाइल फोन पर चलाई जा रही कॉलर ट्यून पर तल्ख टिप्पणी की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए इस कॉलर ट्यून को परेशान करने वाला बताया है।

खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस विपिन संघी और जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने कहा है कि जब सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में कोरोना वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं है। तो लोगों को कॉलर ट्यून के जरिए संदेश देकर परेशान क्यों किया जा रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि जब भी कोई शख्स किसी को फोन करता है तो उसे कॉलर ट्यून सुनाई पड़ती है कि वैक्सीन लगवाइए। यह कॉलर ट्यून चिढ़ पैदा करने वाली है।

भारत में लोग वैक्सीन का इंतजार कर रहे हैं और सरकार के पास लोगों को उपलब्ध कराने के लिए वैक्सीन मौजूद ही नहीं है। ऐसे में फिर भी आप यह कह रहे हैं कि टीका लगाइए।

तो इस तरह के संदेश का क्या मतलब है? आपको कोई अन्य मैसेज भी कॉलर ट्यून के लिए चलाने चाहिए।

इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को लोगों में जागरूकता फैलाने की सलाह दी है। एक ही तरह का संदेश सुनकर लोग चिढ जाते हैं। आप अलग-अलग तरह के संदेश बनाकर चलाएं ताकि इससे लोगों को मदद मिल पाए।

केंद्र सरकार को मौजूदा हालात देखते हुए जमीनी सच्चाई देखकर ही कदम उठाने चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि 18 मई तक इस मामले में रिपोर्ट पेश की जाए कि कोरोना के संदर्भ में जानकारी का प्रचार प्रसार करने के लिए उन्होंने कौन से कदम उठाए हैं।

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