संतरे के बगीचे में पेड़ के नीचे इलाज करा रहे गांवों के लोग, कोरोना वार्ड में भर्ती होने के डर से नहीं जा रहे अस्पताल

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संतरे के बगीचे में पेड़ के नीचे इलाज करा रहे गांवों के लोग, कोरोना वार्ड में भर्ती होने के डर से नहीं जा रहे अस्पताल

कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल है. वहीं, हालत यह हैं कि सुसनेर में झोलाछाप डॉक्टर पेड़ पर बोतलें लटका कर मरीज़ों को स्लाइन चढ़ा रहे हैं

नई दिल्ली: 

देशभर में कोरोना के मामलों में हो रही बढ़ोतरी के चलते अस्पतालों में बुरा हाल है. कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं, जिससे मरीजों को अपना इलाज कराने में काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है. कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल है. वहीं, हालत यह हैं कि सुसनेर में झोलाछाप डॉक्टर पेड़ पर बोतलें लटकाकर मरीज़ों को स्लाइन चढ़ा रहे हैं. यह मामला सुसनेर से पिड़ावा राजस्थान की ओर जाने वाले रास्ते पर ग्राम धान्याखेडी से करीब आधा किलोमीटर दूर का है.

जानकारी के मुताबिक, यहां निजी चिकित्सक मुख्य सड़क से 200 मीटर की दूरी पर स्थित संतरे के एक बगीचे में दरी और कार्टून बिछाकर मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं. वे मरीजों को पेड़ के नीचे लिटाकर उसपर बोतलें लटकाकर बीमारों को स्लाइन चढ़ा रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इसी जगह पर आसपास के करीब 10 गांवों के मरीज बड़ी संख्या में अपना इलाज करवाने के लिए यहां पहुंच रहे हैं

इलाज करा रहे मरीजों को न तो कोरोना का खौफ है और न ही उनके लिए 2 गज की दूरी और मास्क जरूरी है. 

यहां मौजूद मरीजों ने पूछे जाने पर बताया कि उन्हें इस बात का डर है कि अगर सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने गए तो उन्हें कोरोना वार्ड में भर्ती करा दिया जाएगा. इसी खौफ के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के लोग झोलाछाप डॉक्टरों पर भरोसा करके इस तरह अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं.

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