हिमाचल प्रदेश, में आई अचानक बाढ़ क्या होता है बादल का फटना आइए समझते हैं

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हिमाचल प्रदेश, में आई अचानक बाढ़ क्या होता है बादल का फटना आइए समझते हैं

नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बारिश के पानी से पहाड़ों में अचानक बनी बाढ़ की स्थिति ने भयानक तबाही का मंज़र पैदा कर दिया, इन दृश्यों ने 2013 की उत्तराखंड की तबाही की याद ताजा कर दी, जहां बादल के फटने की वजह से आई बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान लील ली थी. इसकी वजह बादल का फटना बताई गई थी, जो एक खास तरह के मौसम के हालात की वजह से होता हैं. आइए जानते हैं…

क्या होता है बादल का फटना
साधारण भाषा में कहें तो, जब अचानक थोड़े समय के लिए एक छोटे क्षेत्र में बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है तो इसे बादल का फटना कहते हैं. आपदा प्रबंधन के राष्ट्रीय संस्थान की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में उत्तराखंड में अचानक आई बाढ़ बादल फटने के साथ तूफान और ओले गिरना का नतीजा था. बादल फटने की घटना तकनीकी तौर पर देखा जाए तो कहीं भी घट सकती है, लेकिन आमतौर पर पहाड़ और रेगिस्तानी इलाकों में ये ज्यादा देखने को मिलती है

क्यों फटता है बादल
बादल का फटना तूफान से संबंधित होता है और ये तब पैदा होता है जब नमी से भरी हुई हवा पहाड़ों की ढाल पर ऊपर की ओर जाती है. इस तरह से खड़े बादलों के कॉलम को तूफानी बादल के नाम से जाना जाता है. जिसकी वजह से बारिश, तूफान और बिजली गिरती है. बादलों के इस तरह तेजी से ऊपर जाने की प्रक्रिया को ‘ओरोग्राफिक लिफ्ट’ या पर्वतीय चढ़ाई कहा जाता है.

ब्रिटानिका एन्साइक्लोपीडिया का कहना है कि इस तरह नमी से भरी हवा तेजी से ऊपर जाती है, ये संघनित पानी की बूंदों को ज़मीन पर गिरने से रोकती है. इस वजह से अधिक मात्रा में पानी इकट्ठा हो जाता है और अगर ऊपर जाने की गति कमजोर है तो पूरा पानी एक साथ गिर जाता है. ये कुछ इस तरह का है कि कोई पानी का बड़ा सा थैला लेकर सीधी चढ़ाई चढ़ रहा है और अचानक उसका पैर फिसल जाए तो पानी एक साथ गिर पड़ेगा.

इस तरह भारी बारिश की अपेक्षा बादल फटने पर एक बार में बहुत ज्यादा पानी बरस जाता है.
बादल फटने का क्या असर हो सकता है.

जब पहाड़ी इलाकों में बादल फटता है तो तबाही ज्यादा भयानक होती है क्योंकि तेजी से नीचे आता पानी अपने साथ पेड़ों को उखाड़ते हुए और गाद लेते हुए आगे बढ़ता है. नीचे आते हुए पानी गति पकड़ लेता है और अपने रास्ते में आने वाले सभी चीजों और निर्माण को साथ में ले जाता है. पहाड़ों पर जहां बादल फटने से भूस्खलन होता है वही मैदान में इसकी वजह से बाढ़ आ सकती है.

क्या बादलों के फटने का अनुमान लगाया जा सकता है
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगर एक घंटे के दौरान किसी एक मौसम स्टेशन पर 100 मिमि बारिश रिकॉर्ड की जाती है तो इसे बादलों के फटने की श्रेणी में रखा जाता है. मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बादलों के फटने का अनुमान लगा पाना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत कम जगह और कम समय के लिए होता है.

मौसम विभाग का कहना है कि इसके लिए बादल फटने वाले संवेदनशील इलाकों में रडार नेटवर्क अच्छा होने की ज़रूरत है या बहुत उच्च-रिज़ॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमान मॉडल की आवश्यकता है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम विभाग की परिभाषा पर्याप्त नहीं है, डाउन टू अर्थ पत्रिका में लिखे एक लेख के मुताबिक डेनिश मौसम संस्थान का मानना है कि आधे घंटे के भीतर किसी निश्चित क्षेत्र में अगर 15 मिमि बारिश होती है तो इसे बादल का फटना कहा जाता है.

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