हिमाचल में हर साल आते थे 2 करोड़ सैलानी, कोरोना ने टूरिज्म सेक्टर की तोड़ी कमर

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हिमाचल में हर साल आते थे 2 करोड़ सैलानी, कोरोना ने टूरिज्म सेक्टर की तोड़ी कमर

Corona Impact on Himchal Tourism: एसोसिएशन का कहना है कि सरकार बीते वर्ष वर्किंग कैपिटल लोन इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम लाई थी लेकिन उसका लाभ किसी भी पर्यटन कारोबारी को नहीं मिला है. इस वर्ष फिर से सरकार ने इस योजना में बदलाव के लिए सुझाव मांगे हैं, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन बदलावों को मंजूरी नहीं दी है.

शिमला. हिमाचल में हर साल करीब करीब 2 करोड़ पर्यटक (Tourist) आते हैं, कोरोना काल में पर्यटकों की आमद न के बराबर है. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार में 2020-21 में 32 लाख 13 हजार 379 टूरिस्ट हिमाचल आए, इनमें से मात्र 42 हजार 665 विदेशी पर्यटक थे. 2019-20 में 1 करोड़ 72 लाख 12 हजार 107 टूरिस्ट हिमाचल (Himachal Pradesh) आए थे. बीते साल नवंबर माह के बाद कुछ समय तक पर्यटन की गतिविधियां शुरू हो गईं थी लेकिन कोरोना (Corona Virus) की दूसरी लहर आने के बाद सबकुछ ठप हो गया. सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाले, दुकान चलाने वाले, टैक्सी चालक, टूरिस्ट गाइड, फोटोग्राफर से लेकर होटल रेस्त्रां चलाने वाले तक हर कोई परेशान है. शिमला का रिज मैदान सूना पड़ा है, घोड़े गायब हैं और फोटोग्राफर की आमदनी के सन्दूक पर ताला लगा हुआ है. होटल और ढाबों में काम करने वाले हजारों लोग को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है.

कॉफी हाउस की हालात खराब

शिमला के माल रोड पर स्थित प्रसिद्ध इंडियन कॉफी हॉउस की कॉफी देश के पहले प्रधानमंत्री को काफी पसंद थी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पसंद है. अब हालत ये है कि पीएम नरेंद्र मोदी को कॉफी पिलाने वाले यहां के स्टाफ के बीते 9 महीने से वेतन नहीं मिला है. पीएम को कॉफी पिलाने वाले दाड़लाघाट के रहने वाले भागीरथ ने बताया कि हालत ऐसी है कि उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है. कुछ कर्मचारियों को एक संस्था राशन-पानी की व्यवस्था कर रही है. यहां के मैनेजर आत्मा राम शर्मा ने कहा कि 47 कर्मचारियों का 9 महीने का वेतन बकाया है. हर महीने इनके वेतन पर करीब 7 लाख रुपये का खर्च आता है. जब टूरिस्ट सीजन पीक पर होता था तो दिन की कमाई 60 से 65 हजार रुपये होती थी, लेकिन अब मुश्किल से दिन में 2 हजार रुपये बन रहे हैं

कोरोना के इस दौर में भी कुछ पर्यटक घूमने पहुंचे हैं.पर्यटक हालांकि टेस्ट करवाकर आए हैं लेकिन कह रहे हैं कि भगवान के भरोसे पर घुमने निकले हैं टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंदर सेठ का कहना है कि पर्यटन उद्योग को कोई आर्थिक मदद न मिलने होटल कारोबारी बुरी तरह से त्रस्त हैं. लगभग सभी कारोबारियों ने बैंक से कर्जा लिया है और स्थिति यही रही तो जून महीने में 90% से भी अधिक पर्यटन कारोबारियों ऋण एनपीए हो जाएगा. कोविड की दूसरी लहर के बाद 3 महीनों से होटल बंद हैं जिसके चलते कारोबारी लोन की किश्ते नहीं दे पा रहे हैं. सिविल स्कोर खराब हो रहा है और वर्किंग कैपिटल शून्य तक पहुंचने वाला है.

सरकार से रखी मांग

एसोसिएशन ने सरकार से आर्थिक पैकेज की मांग की है. साथ ही बिजली,पानी, कूड़े के बिल समेत  टैक्स में रियायत देने की मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि सरकार बीते वर्ष वर्किंग कैपिटल लोन इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम लाई थी लेकिन उसका लाभ किसी भी पर्यटन कारोबारी को नहीं मिला है. इस वर्ष फिर से सरकार ने इस योजना में बदलाव के लिए सुझाव मांगे हैं, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन बदलावों को मंजूरी नहीं दी है. एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत होटलों को खोलने की अनुमति दी जाए.

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