BJP नेता चुनाव से पहले हार मानी बोले-किसानों के मुद्दे को हल करें, नहीं तो 2022 में होगा बड़ा नुकसान

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मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के हो रहे विरोध का सामना पंजाब और हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को करना पड़ रहा है।

खासतौर पर पंजाब के नेताओं के कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जा रहा है। जिसे देखते हुए अब कई भाजपा नेता भी मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।

इस संदर्भ में भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी ने भी अपनी ही पार्टी के खिलाफ सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान हमारे भाई है। यह सब हमारे अपने लोग हैं। इसलिए हम इनके साथ बुरा नहीं कर सकते।

कोरोना महामारी के नियमों का उल्लंघन करने से किसानों को रोक पाने में भी सरकार असमर्थ साबित हो रही है। तो फिर इसका हल क्यों नहीं निकाला जा रहा ?

दुनिया में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है। जिसका हल नहीं निकाला जा सकता। कई बड़े-बड़े मसलों का हल बातचीत के जरिए निकाला जाता है। सरकार और किसान प्रदर्शनकारियों के बीच मध्यस्थ के जरिये इस मुद्दे को सुलझाना जरूरी है।

पंजाब के भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं का ऐसा ही मानना है कि हमें किसानों की आवाज को उठाना चाहिए।

दिल्ली में सत्तारूढ़ मोदी सरकार सिर्फ भाजपा की सरकार नहीं है। यह सब की सरकार है। भाजपा नेता का कहना है कि हमें पंजाब के लोगों की भावनाओं को समझते हुए इस लड़ाई को लड़ना चाहिए।

हमने पार्टी की शर्तों को मानते हुए अपनी बात को कई बार रखने की कोशिश की। लेकिन अभी तक इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई है। हम कब तक इंतजार करते रहेंगे।

इसके साथ ही भाजपा नेता ने यह भी कहा है कि साल 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।

इसलिए समय आ गया है कि भाजपा को इस मुद्दे का हल जल्द से जल्द निकालने की जरूरत है।

गौरतलब है कि बीते साल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर किसान धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लगभग 6 महीने गुजर जाने के बाद भी सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई हल नहीं निकल पाया है।

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