एक समय ऐसा था जब लोग अपने बच्चों की तरह पर्यावरण की भी चिंता करते थे.

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एक समय ऐसा था जब लोग अपने बच्चों की तरह पर्यावरण  की भी चिंता करते थे.

एक समय ऐसा था जब लोग अपने बच्चों की तरह पर्यावरण (environment) की भी चिंता करते थे. बच्चों के बड़े होने के साथ साथ वे पेड़ पौधों की भी चिंता करते थे. दक्षिण के क्षेत्रों में लोगों में पर्यावरण के प्रति ज्यादा जागरूकता थी इसमें भी विशेष रूप से पश्चिमी घाट और अर्ध मलनाड के क्षेत्रों से आने वालों में पर्यावरण के प्रति लगाव और प्रेम अधिक था. समय बीतने के साथ साथ धीरे धीरे सब बदल गया और रोज मर्रा की व्यस्तता और आधुनिक युग की चका चौंध के बीच लोग पर्यावरण से दूर होते ही चले गए.

पर्यावरण से लगाव हटने का मूल कारण था युवा पीढ़ी का पहले पढ़ाई के लिए बाहर जाना और फिर बाद में कमाई के लिए दूसरे शहरों में बस जाना. युवा गांव से निकलते गए और गांव धीरे धीरे वृद्धाश्रम की तरह बनते चले गए. तेजी से बदलते समय में भी कर्नाटक के हासन जिले के एक लड़के की पर्यावरण के प्रति बनी भावना को कोई भी नहीं बदल पाया. यहां का 20 साल का यह लड़का दूसरों से बेहद खास है.

हम बात कर रहे हैं गुडेनहल्ली गांव में रहने वाले गिरीश केआर की. गिरीश इस समय बीए प्रथम वर्ष का छात्र है और अब तक उसने 5000 से अधिक पौधे लगा दिए हैं. गिरीन ने अपने काम से पूरे देश कि लिए एक मिसाल कायम की है और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में के लिए वह एक जीता जातता उदाहरण है. लोग बताते हैं कि गिरीश ने 12 साल की उम्र से पेड़ लगाने शुरू कर दिए थे.

आर्थिक तंगी भी नहीं रोक सकी कदम

गिरीश एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. पिता रमेश और मां लता दिहाड़ी मजदूर हैं, लेकिन गरीबी गिरीश की गतिविधियों को कभी नहीं रोक पाई. तमाम आर्थिक दिक्कतों के बावजूद गिरीश ने पर्यावरण की रक्षा करना जारी रखा. उसने छोटी सी कम उम्र से ही पर्यावरण की रक्षा करने और सैकड़ों पौधे लगाने का संकल्प ले लिया था. उसने जामुन के पेड़ से लेकर नीम और चंपा तक कई तरह के पेड़ लगाए.

गिरीश स्कूल के दौरान स्काउट और गाइड का भी हिस्सा था और अब वह राष्ट्रीय सेवा योजना में सक्रिय है.गिरी को उनकी निस्वार्थ भावना से सेवा करने के लिए कई अवार्ड भी मिले. 2018 में मैसूर विश्वविद्यालय ने उन्हें वर्ष के उत्कृष्ट स्वयंसेवी के सम्मान से सम्मानित किया था. उत्कृष्ट कार्य के लिए कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल वजुभाई वाला ने भी उन्हें 2020 में सम्मानित किया था.

देश से गिरीश ने कहा- कोई अहसान नहीं कर रहा

News18 से बात करते हुए गिरीश ने कहा कि वह पौधे लगाकर समाज पर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं. “हमारे पर्यावरण की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है. दूसरों को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। प्रकृति की रक्षा के लिए सभी को अपना योगदान देना होगा. मैं अपने हिस्से का काम करता रहूंगा, मुझे खुशी है कि कई लोगों ने मुझसे हाथ मिलाया है. मेरे दोस्त, मेरे शिक्षक, मेरे माता-पिता सभी वास्तव में सहायक हैं, ”गिरीश ने क

गरीबी के बावजूद कम उम्र से ही पर्यावरण संरक्षण में शामिल होना वाकई काबिले तारीफ है. अनुमान है कि गिरीश अब तक अपने दोस्तों के साथ 5000 से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं. इससे ही पता चलता है कि वह कितने प्रतिबद्ध हैं. यह अनुकरणीय है कि गिरीश ने महज बीस साल की उम्र में यह सब हासिल किया है.

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