ऐसे सरकारी स्‍कूल में पढ़ते हैं हमारे बच्‍चे’,अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को भेजींं हैरान करने वाली तस्‍वीरें

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ऐसे सरकारी स्‍कूल में पढ़ते हैं हमारे बच्‍चे’,अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को भेजींं हैरान करने वाली तस्‍वीरें

जर्जर हालत में खड़े सरकारी स्‍कूल की यह तस्‍वीर हरियाणा विधानसभा की शिक्षा व स्वास्थ्य कमेटी की चेयरमैन व बढखल की विधायक सीमा त्रिखा के क्षेत्र के एनआईटी 1 की हैंं. गिरने की कगार पर खड़े स्‍कूलों की हालत सुधारने के लिए अभियान चला रहे अभिभावक एकता मंच ने इससे भी ज्‍यादा खराब हालत की तस्‍वीरें शिक्षा विभाग को भेजी हैं साथ ही लिखा है कि हमारे बच्‍चे ऐसे स्‍कूलों में पढ़ते हैं, क्‍या आप यहां अपने बच्‍चों को पढ़ाएंगे

 यह तस्‍वीर किसी कूड़ाघर की नहीं है बल्कि सरकारी स्‍कूल में जमा कूड़े की है जहां आम लोग कूड़ा फेंक जाते हैं. इसी परिसर में बच्‍चे खेलते हैं. अभिभावक एकता मंच ने अधिकारियों से पूछा है ऐसी हालत में कोई भी अभिभावक अपने बच्‍चे को सरकारी स्‍कूल में कैसे भेजे.

यह तस्‍वीर किसी कूड़ाघर की नहीं है बल्कि सरकारी स्‍कूल में जमा कूड़े की है जहां आम लोग कूड़ा फेंक जाते हैं. इसी परिसर में बच्‍चे खेलते हैं. अभिभावक एकता मंच ने अधिकारियों से पूछा है ऐसी हालत में कोई भी अभिभावक अपने बच्‍चे को सरकारी स्‍कूल में कैसे भेजे.

 यह स्‍कूल का नजारा है. यह आवारा जानवरों का अड्डा बन चुका है. पूरे दिन यहां सुअर और कुत्‍ते घूमते रहते हैं. इसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा के कैसे इंतजाम होंगे.

यह स्‍कूल का नजारा है. यह आवारा जानवरों का अड्डा बन चुका है. पूरे दिन यहां सुअर और कुत्‍ते घूमते रहते हैं. इसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा के कैसे इंतजाम होंगे.

 स्‍कूल की दीवारें टूटी हुई हैं ऐसे में कोई भी कहीं से भी यहां आ सकता है. हरियाणा अभिभावक एकता मंच का आरोप है कि विद्यार्थियों को ऐसे स्‍कूल में पढ़ा कर उनके स्वास्थ्य व भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.

स्‍कूल की दीवारें टूटी हुई हैं ऐसे में कोई भी कहीं से भी यहां आ सकता है. हरियाणा अभिभावक एकता मंच का आरोप है कि विद्यार्थियों को ऐसे स्‍कूल में पढ़ा कर उनके स्वास्थ्य व भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.

 स्‍कूल में 10 टॉयलेट हैं लेकिन सभी की हालत ऐसी ही है. यह टॉयलेट बंद पड़ा है लेकिन जो चालू हैं वे बहुत गंदे हैं. मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि इन स्कूलों की कंडम व जर्जर हो चुकी बिल्डिंग व कमरों के बारे में मंच की ओर से कई बार जिला शिक्षा अधिकारी को कहा गया है, जर्जर व कंडम बिल्डिंग व कमरों की वीडियो व फोटो भी भेजी गई है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आज तक इन स्कूलों में जाकर स्थिति का आकलन नहीं किया है.

स्‍कूल में 10 टॉयलेट हैं लेकिन सभी की हालत ऐसी ही है. यह टॉयलेट बंद पड़ा है लेकिन जो चालू हैं वे बहुत गंदे हैं. मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि इन स्कूलों की कंडम व जर्जर हो चुकी बिल्डिंग व कमरों के बारे में मंच की ओर से कई बार जिला शिक्षा अधिकारी को कहा गया है, जर्जर व कंडम बिल्डिंग व कमरों की वीडियो व फोटो भी भेजी गई है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आज तक इन स्कूलों में जाकर स्थिति का आकलन नहीं किया है

 कूड़े के बीच से बने इस रास्‍ते से बच्‍चे स्‍कूल में आते-जाते हैं. इसके साथ ही इस स्‍कूल में आने वाले असामाजिक तत्‍वों की शिकायत कई बार पास की पुलिस चौकी में की जा चुकी है. हालांकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

कूड़े के बीच से बने इस रास्‍ते से बच्‍चे स्‍कूल में आते-जाते हैं. इसके साथ ही इस स्‍कूल में आने वाले असामाजिक तत्‍वों की शिकायत कई बार पास की पुलिस चौकी में की जा चुकी है. हालांकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

 स्‍कूल की छतों और दीवारों में छेद हो चुके हैं. बारिश में पानी टपकता रहता है. खास बात है कि इस स्‍कूल में स्कूल में कक्षा एक से पांच तक 260 व कक्षा 6 से 10 में 255 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.

स्‍कूल की छतों और दीवारों में छेद हो चुके हैं. बारिश में पानी टपकता रहता है. खास बात है कि इस स्‍कूल में स्कूल में कक्षा एक से पांच तक 260 व कक्षा 6 से 10 में 255 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.

 यह स्कूल बहुत पुराना है. 50 साल पहले टीन की छत के बने 17 कमरे कंडम व जर्जर घोषित किए जा चुके हैं. इनके अलावा अन्य बने हुए 13 कमरे भी जर्जर हालत में हैं उनके लेंटर की सरिया दिखाई दे रही हैं. अंधेरी कोठरीनुमा कमरों की दीवारें भी दरवाजे बन गई हैं.

यह स्कूल बहुत पुराना है. 50 साल पहले टीन की छत के बने 17 कमरे कंडम व जर्जर घोषित किए जा चुके हैं. इनके अलावा अन्य बने हुए 13 कमरे भी जर्जर हालत में हैं उनके लेंटर की सरिया दिखाई दे रही हैं. अंधेरी कोठरीनुमा कमरों की दीवारें भी दरवाजे बन गई हैं.

 बच्‍चों के लिए खेल के साधनों के नाम पर यहां बस ये झूलों का स्‍टेंड लगा हुआ है. इस पर भी जंग लगी है.

बच्‍चों के लिए खेल के साधनों के नाम पर यहां बस ये झूलों का स्‍टेंड लगा हुआ है. इस पर भी जंग लगी है.

 स्‍कूल के आसपास गंदगी फैली हुई है. यहां न सफाई के इंतजाम हैं और न ही कूड़ा उठाने के. इससे बीमारियां फैलने का भी खतरा है.

स्‍कूल के आसपास गंदगी फैली हुई है. यहां न सफाई के इंतजाम हैं और न ही कूड़ा उठाने के. इससे बीमारियां फैलने का भी खतरा है.

 मंच ने शिक्षा विभाग से कहा है कि अगर स्‍कूल की हालत को नहीं सुधारा जाता है तो वह एक बार फिर पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय का सहारा लेगा. हाईकोर्ट आदेश के बाद फरीदाबाद के कई स्‍कूलों की बिल्डिंग नई बनना शुरू हो गई है.

मंच ने शिक्षा विभाग से कहा है कि अगर स्‍कूल की हालत को नहीं सुधारा जाता है तो वह एक बार फिर पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय का सहारा लेगा. हाईकोर्ट आदेश के बाद फरीदाबाद के कई स्‍कूलों की बिल्डिंग नई बनना शुरू हो गई है.

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