कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि भारतीय अधिकारी तालिबान से मिलने गए थे.

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नई दिल्ली. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि भारतीय अधिकारी चुपचाप तालिबान से मिलने गए थे. दिग्विजय ने यह ट्वीट ऐसे समय में किया है जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा के दौरान अफगानिस्तान  पर चर्चा की. समाचार संस्था बीबीसी की एक रिपोर्ट ट्वीट करते हुए राज्यसभा सांसद ने लिखा, ‘यह बहुत ही गंभीर विषय है. भारत सरकार को इस विषय पर तत्काल वक्तव्य देना चाहिए. क्या BJP IT Cell इसको संज्ञान में लेकर देशद्रोह की श्रेणी में लेगा?’

बीबीसी की रिपोर्ट में अंग्रेजी अखबार द हिन्दू में दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने कतर की राजधानी दोहा में मुलाकात की. अखबार ने दावा किया है कि कतर के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है कि भारतीय अधिकारियों का दौरा तालिबान के नेताओं से वार्ता के लिए हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार इस आशय की पुष्टि हुई है कि भारत, तालिबान से सीधे बात कर रहा है. द हिन्दू के अनुसार एक अधिकारी ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि तालिबान से बात करने के लिए भारतीय अधिकारियों ने एक दौरा किया.’

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके सरकार के इस तथाकथित कदम पर सवाल उठाया.

गौरतलब है कि अखबार दावा विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘भारत अफगान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत में तेजी लाने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता रहा है, जिसमें अंतर-अफगान वार्ता भी शामिल है.’

अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए वास्तव में ‘दोहरी शांति’ की जरूरत है: जयशंकर
जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए सच्चे अर्थों में देश के भीतर और इसके आसपास ‘दोहरी शांति’ की आवश्यकता है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं किये जाने की नीति अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है.

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा के दौरान कहा कि हिंसा में तत्काल कमी और असैन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये भारत अफगानिस्तान में स्थायी और व्यापक संघर्ष विराम चाहता है. उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए सच्चे अर्थों में ‘दोहरी शांति’ यानी अफगानिस्तान के भीतर और इसके आसपास अमन की आवश्यकता है. इसके लिए उस देश के भीतर और आसपास सभी के हितों में सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं एक समावेशी, अफगान-नेतृत्व वाली, अफगान-स्वामित्व वाली और अफगान-नियंत्रित शांति प्रक्रिया के लिए अपना समर्थन दोहराना चाहता हूं.’ जयशंकर ने कहा कि भारत एक वैध लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सामान्य स्थिति की बहाली सुनिश्चित करने के लिए अफगानिस्तान के साथ खड़ा है, जो अफगानिस्तान और क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक है.

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