कुशासन: रेप का आरोप लगाने वाली कोरोना मरीज की मौत, बेटी बोली- मेरी मां की हत्या हुई है

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ये कहानी है उस बिहार की जहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दावा करते हैं कि उनके राज्य में कानून का राज है।

उनके समर्थक उन्हें सुशासन बाबू कहते हैं लेकिन इस कोरोना काल में बिहार में ऐसी घटना हुई है, जिसने उनके कथित कानून के राज के दावे की धज्जियां उड़ा कर रख दी है।

बिहार की राजधानी पटना का एक बेहद प्रतिष्ठित अस्पताल है पारस अस्पताल। इस अस्पताल में एक कोरोना पीड़ित महिला के साथ रेप की घटना सामने आई थी। अब उस महिला की मौत हो गई है।

पीड़िता की बेटी ने मौत के एक दिन पहले कहा था कि मेरी मां ठीक हो जाने के बाद खुद ही बयान देगी कि उसके साथ इस अस्पताल में क्या क्या हुआ है।

बेटी के इस बयान के बाद पीड़िता की मौत हो गई है, इस पर पीड़िता की बेटी का कहना है कि उसकी मां की मौत नहीं हुई है बल्कि मां का मर्डर हुआ है।

मेरी मां बिल्कुल ठीक हो गई थी। उसके साथ जब इस अस्पताल में गलत काम हुआ, तब से ही उसकी तबीयत खराब होने लगी थी।

मौत की खबर के बाद पीड़िता की बेटी का रो रोकर बुरा हाल है। मृत महिला सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा की रहने वाली थी लेकिन पटना के भूतनाथ रोड में रहा करती थी और आंगनबाड़ी सेविका थी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार महिला की मौत हृदय गति रुकने से हुई है।

पीड़िता की बेटी ने आरोप लगाया था कि 16 मई की शाम 06 बजे से 17 मई की सुबह 11 बजे के बीच इलाज के दौरान अस्पताल में उसकी मां के साथ रेप की कोशिश की गई थी।

बेटी ने अपनी मां से बातचीत का एक वीडियो भी बनाया गया था जिसमें वो रेप के बारे में पूछ रही थी।

बेटी का कहना है कि अस्पताल प्रशासन पर रेप व हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। मेरी मां का मर्डर किया गया है।

मेरी मां पैदल चल कर ही अस्पताल आई थी लेकिन यहां पर रेप की कोशिश के बाद वो वेंटिलेटर पर चली गई और उसकी मौत हो गई, जबकि पुलिस और अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पीड़िता की बेटी का आरोप बेबुनियाद है।

पारस अस्पताल राजधानी पटना का इतना महंगा अस्पताल है, जिसमें आम आदमी इलाज कराने के बारे में सोच नहीं सकता। एक महिला जो इस अस्पताल में भर्ती थी, उसकी बेटी रेप की कोशिश की बात कहती है, पीड़िता की मौत हो जाती है लेकिन पुलिस भी रेप की कोशिश के आरोपों को झूठा और अस्पताल को क्लीन चिट दे देती है।

पुलिस किस आधार पर अस्पताल को क्लीन चिट दे रही है, इसे बखूबी समझा जा सकता है ! इसके साथ ही एक बात और फिर से प्रमाणित हो चुकी है कि इस देश में गरीब और कमजोर को न्याय मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।

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