तमिलनाडु: दुकान के बाहर केले लटकाकर बोर्ड लगा जाता है मालिक, भूख लगे तो खा लेना

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तमिलनाडु: दुकान के बाहर केले लटकाकर बोर्ड लगा जाता है मालिक, भूख लगे तो खा लेना

राज्‍यों में लगाए गए पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन (Lockdown) का सबसे ज्‍यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है. इन सब कठनाइयों के बीच भी तमिलनाडु (Tamil Nadu) का एक फल विक्रेता मजदूरों की कर रहा है मदद.

नई दिल्‍ली. देश में कोरोना (Corona) की दूसरी लहर (Second Wave) का असर भले ही कम होने लगा है लेकिन संकट अभी कम नहीं हुआ है. यही कारण है कि राज्‍य सरकारें पिछले कई महीनों से लॉकडाउन (Lockdown) की समय सीमा बढ़ाती जा रही है. राज्‍यों में लगाए गए पूर्ण या आंशिक लॉकडाउन का सबसे ज्‍यादा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है. इन सब कठनाइयों के बीच भी तमिलनाडु का एक फल विक्रेता मजदूरों के लिए कुछ ऐसा कर रहा है जिसे जानने के बाद आप भी उसकी तारीफ करते नहीं थकेंगे.

दरअलस तमिलनाडु के थुटूकुडी जिले के कोविलपट्टी में फल की दुकान बंद हो जाने के बाद भी मालिक मुत्थुपांडी केले के गुच्छे को दुकान के अंदर नहीं ले जाते हैं और सभी केले दुकान के बाहर ही लटकते रहते हैं. दुकानदार मुत्‍थुपांडी ने अपनी दुकान के बाहर एक पोस्‍टर भी लगा रखा है, जिस परलिख रखा है- अगर आपको भूख लगी है तो इन्हें मुफ्त में खा सकते हैं, कृपया बर्बाद न करें.

बता दें क‍ि दुकान मुत्थुपांडी इस दुकान को किराए की जगह पर चलाते हैं. मुत्थुपांडी पिछले दो साल से कोविलपांडी में ये दुकान चला रहे हैं. हर दिन जब वह दुकान बढ़ाने लगते हैं तो दुकान के बाहर केले के कई गुच्छे टंगे छोड़ जाते हैं. कई बेघर लोग, थके यात्री और बच्चे दुकान पर आकर गुच्छों से केले तोड़कर खाते हैं. साथ ही दुकानदार का आभार जताते हैं.

मुत्थुपांडी का कहना है कि कोरोना महामारी के इस संकट में कई लोगों के पास रोजगार नहीं है. ऐसे में उन्‍हें कभी भूखा न रहना पड़े इसलिए मैं अपनी ओर से जो थोड़ी मदद कर सकता हूं करता हूं. उन्‍होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरे इस प्रयास का फायदा उन लोगों को मिले जो सच में भूखे हैं और खाने के लिए केले लेना चाहते हैं

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