देश के दो ऐसे मुख्यमंत्री आबकारी नीति में परिवर्तन ला रहे हैं जो कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाते

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देश के दो ऐसे मुख्यमंत्री आबकारी नीति में परिवर्तन ला रहे हैं जो कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाते

देश के दो ऐसे मुख्यमंत्री आबकारी नीति (Liquor Policy) में परिवर्तन ला रहे हैं जो कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाते. इनमें से एक संत हैं तो दूसरा धर्मपरायण शाकाहारी जो IIT ग्रेजुएट भी है. लेकिन भारत में सबसे चर्चित दो राज्यों के ये मुख्यमंत्री इस वक्त आबकारी नीति में सबसे साहसिक बदलाव कर रहे हैं. कुछ बदलाव तो इनके राज्यों में शराब के उपभोग का तरीका भी बदल सकते हैं. संभव है कि ऐसा परिवर्तन आगे पूरे देश में हो.

बीते अप्रैल महीने से योगी आदित्यनाथ सरकार ने व्हिस्की, रम, वोदका और जिन के बजाय बीयर और वाइन जैसे अपेक्षाकृत सॉफ्ट ड्रिंक पर ध्यान देना शुरू किया है. 2021-22 की उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति में बीयर और वाइन को सस्ता किया गया है जबकि हार्ड ड्रिंक का दाम थोड़ा बढ़ा है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने बीयर पर एक्साइज ड्यूटी 280% से कम करके 200% कर दी है. नीति में बीयर की बिक्री पर एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ाई है जबकि अन्य हार्ड ड्रिंक्स पर 7.5% की वृद्धि की गई है. सरकार ने कोविड-19 सेस आधा कर दिया जिससे राज्य में स्थानीय बेवरेज और विदेशी शराब, वाइन का दाम कम हो गया.

महात्वाकांक्षाएं अच्छे प्रशासकों को व्यवहारकुशल बना देती हैं
महामारी के आउटब्रेक के बाद बड़ी कंपनियां चीन छोड़ने की तैयारी में हैं, ऐसे में यूपी चाहता है कि उसके राज्य में निवेश हो. राज्य सरकार फिल्मसिटी और नए एयरपोर्ट्स पर भी काम कर रही है. दरअसल महात्वाकांक्षाएं अच्छे प्रशासकों को व्यवहारकुशल बना देती हैं.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में शराब की नई ट्रेंडी दुकानें देखकर कोई इसे एक भगवा साधु के साथ शायद न जोड़े लेकिन उनकी नई आबकारी नीति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बिजनेस संबंधी यात्रा करने वालों, नए उम्र के कामकाजी लोगों का ध्यान खींच रही है.

अरविंद केजरीवाल के बदलाव
इस दिशा में अरविंद केजरीवाल के प्रयास और ज्यादा साहसी हैं. दिल्ली की प्रस्तावित नई आबकारी नीति ने लाइसेंसिंग और कंट्रोलिंग सिस्टम पर जबरदस्त प्रहार किया है. नई नीति के तहत अब शराब की होम डिलीवरी हो सकेगी. लाइसेंस ऑनलाइन बोलियों के जरिए दिए जाएंगे.

नए बदलाव
पुराने जालीनुमा दिखने वाले ठेकों की जगह अब वॉक-इन लिकर स्टोर लेंगे. माइक्रोब्रुअरी के आने का रास्ता खुलेगा. साथ ही बार रात के तीन बजे तक खुले रहेंगे, अगर आपके पास 24 घंटे बार चलाने का लाइसेंस न हो तो. दूसरे सुधारों में सरकार का रिटेड अल्कोहल बिजनेस से अलग हटना भी है. टैक्स सिस्टम में सुधार के अलावा ड्राई डे की संख्या घटाकर 21 से 3 किए जाने का प्रावधान है.

दिल्ली दुनिया के व्यस्ततम शहरों में से एक है. ये देश की राजधानी है जिसके पास लोकतांत्रिक और भौगोलिक फायदे भी हैं. ये वक्त है जब नैतिकता का दबाव कम किया जाए और इस जगह के माहौल को थोड़ा हल्का किया जाए.

यूपी ने बदला अपने बारे में दृष्टिकोण
दूसरी तरफ यूपी की निगाहें चीन की तरफ भी हैं. अब तक यूपी इस दृष्टिकोण में फंसा हुआ था कि वहां प्रतिगामी सोच है और साफ-सफाई कम है. लेकिन साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं को पूरी सुविधाएं देकर और स्वच्छता के साथ 2018 का कुंभ आयोजित कर योगी सरकार ने दिखा दिया है कि यूपी एक टॉप क्लास इंटरनेशनल होस्ट बन सकता है.

शराब पीने की व्यावहारिक उम्र
योगी और केजरीवाल दोनों ने ही शराब पीने की उम्र ज्यादा व्यावहारिक यानी 21 वर्ष रखी हुई है. एक समझदारी भरी आबकारी नीति से राजस्व और इन्वेस्टमेंट दोनों का लाभ होता है. ये यूपी और दिल्ली को महाराष्ट्र, बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों पर एक बढ़त देता है. इन राज्यों की सरकारें शराब के मूल्य को लेकर लालचभरा व्यवहार कर रही हैं जिससे शराब मिडिल क्लास की पहुंच से लगभग दूर जा चुकी है. इसके अलावा शराब की दुकानों को जल्द बंद कर एक आलसीपन भी प्रदर्शित किया जा रहा है.

लेकिन यहां तमगा ऐसे दो मुख्यमंत्रियों को मिलेगा जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत पसंद को दरकिनार करते हुए बहुप्रतीक्षित और सकारात्मक बदलाव किए. ये बदलाव कुछ इस रूप में किए गए जिससे आम नागरिक ड्रिंक एंजॉय कर सकेंगे.

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