देश को ‘फर्जी राष्ट्रवादियों’ से और आयुर्वेद को ‘ढोंगी बाबाओं’ से बचाना होगा : कन्हैया कुमार

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जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार भी अब आयुर्वेद बनाम एलोपैथ की जंग में कूद पड़े हैं। उन्होंने रामदेव के बहाने फर्जी राष्ट्रवादियों और ढोंगी बाबाओं से देश को बचाने की बात कही है।

कन्हैया कुमार ने ट्वीट किया है कि ये संघी भी बड़े अजीब किस्म के प्राणी होते हैं। कहीं कोई व्यक्ति सरकार की आलोचना करता है तो उसे देश विरोधी करार दे दिया जाता है।

रामदेव पर निशाना साधते हुए कन्हैया ने कहा कि लाला रामदेव का विरोध करने पर उसे आयुर्वेद का विरोधी घोषित कर दिया जाता है।

कन्हैया ने कहा- पता नहीं चलता है ऐसे लोग भोले हैं या शातिर? उन्होंने कहा कि आज जरुरत आ गई है कि इस देश को फर्जी राष्ट्रवादियों से और आयुर्वेद को ढोंगी बाबाओं से बचाया जाए।

मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों से देश में एलोपैथ और आयुर्वेद के बीच जंग छिड़ गई है और इस जंग की शुरुआत रामदेव के एक बयान से हुई है।

रामदेव ने पिछले दिनों कहा कि एलोपैथ एक स्टूपिड और वाहियात मेडिकल साइंस है। इसके बाद इंडियन मेडिकल साइंस ने रामदेव के इस बयान पर गहरी नाराजगी जाहिर की।

रामदेव के बयान के बाद सोशल मीडिया और देश भर में एक संघर्ष शुरु हो गया कि एलोपैथ अच्छा या आयुर्वेद अच्छा।

डाॅक्टरों ने कभी भी आयुर्वेद के खिलाफ कुछ नहीं कहा बल्कि रामदेव ने ही एलोपैथ को गलत बताया फिर भी यह बताया जाने लगा कि देश भर के डाॅक्टर आयुर्वेद के खिलाफ हैं।

यह ठीक इसी प्रकार का माहौल बनाया गया जैसे की मोदी सरकार का विरोध करने को कुछ लोग देश के विरोध से जोड़ कर देखने लगते हैं।

सच तो यह है कि रामदेव के पहले भी देश में डाबर, वैद्यनाथ जैसी कंपनियां आयुर्वेदिक दवाएं बनाया करती थी और लोग इनका प्रयोग भी किया करते थें लेकिन कभी इन कंपनियों ने दूसरी मेडिकल साइंस के विरुद्ध कुछ नहीं कहा। देश के लोगों को भी एलोपैथ के साथ साथ आयुर्वेद पर भी भरोसा था।

आयुर्वेदिक डाॅक्टर भी मानते हैं कि जब आप बेहद गंभीर या इमरजेंसी की स्थिति में हैं तब आपको एलोपैथिक डाॅक्टर के पास जाना चाहिए और जब आप किसी सामान्य बीमारी का सामना कर रहे हैं और आपके पास इलाज के लिए पर्याप्त वक्त है तब आप आयुर्वेद की शरण में जा सकते है।

इसमें कहीं कोई बहस या संदेह की बात नहीं है लेकिन रामदेव जैसे लोग अपने कारोबारी लाभ के लिए आयुर्वेद बनाम एलोपैथ की जंग के लिए मैदान तैयार कर रहे हैं।

इस जंग से भले ही रामदेव जैसे व्यापारियों को लाभ हो जाए लेकिन आम आदमी को इससे नुकसान ही होगा।

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