नीतीश कैबिनेट की बड़ी बैठक आज, पंचायतों से जुड़ी नियमावली पर लग सकती है मुहर

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नीतीश कैबिनेट की बड़ी बैठक आज, पंचायतों से जुड़ी नियमावली पर लग सकती है मुहर

पटना. बिहार कैबिनेट की मंगलवार को महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार, शाम 4.30 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में होने वाली इस मीटिंग में त्रिस्तरीय पंचायत के कार्यकाल ख़त्म होने के बाद चलने वाली परामर्श समिति के गठन से जुड़ी नियमावली पर भी मुहर लग सकती है. बता दें कि बिहार पंचायती राज कानून में संशोधन के लिए बिहार सरकार अध्यादेश ला चुकी है. बीते 3 जून को ही राज्यपाल फागू चौहान ने 15 जून बाद त्रिस्तरीय पंचायतों के संचालन के लिए कानून में संशोधन और परामर्शी समिति के गठन के प्रस्ताव पर मुहर भी लगा दी थी.

बता दें कि बिहार में 2016 में गठित पंचायती राज व्‍यवस्‍था और ग्राम कचहरी 15 जून को स्‍वत: भंग हो जाएगी और परामर्शी समिति 16 से काम करने लगेगी. बिहार में ऐसा पहली बार हो रहा है कि त्रिस्‍तरीय पंचायत राज की जगह परामर्शी समितियां काम करेंगी. सरकार के जारी अध्यादेश के अनुसार अब इसके तहत पंचायत सिस्टम में पदों के भी नए नाम हो गए हैं.

अब बदल जाएंगे पदनाम

बिहार सरकार के अध्यादेश के अनुसार, ग्राम पंचायत- ग्राम परामर्शी समिति, पंचायत समिति- पंचायत परामर्शी समिति और जिला परिषद- जिला परामर्शी समिति बन जाएगी. मुखिया कहे जाएंगे- प्रधान, परामर्शी समिति, ग्राम पंचायत प्रमुख कहे जाएंगे- प्रधान, परामर्श समिति, पंचायत समिति. जिला परिषद अध्यक्ष कहे जाएंगे- प्रधान परामर्शी समिति, जिला परिषद.
ऐसे बदल जाएगा पूरा सिस्टम 

बिहार पंचायती राज संशोधन अध्यादेश-2021 के जरिये अब वार्ड, पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का काम परामर्शी समितियों के जिम्मे होगा. 16 जून से पंचायत के मुखिया परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे. विघटित पंचायत के सभी निर्वाचित वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी ग्राम पंचायत के प्रधान सदस्य रहेंगे.

मुखिया जी अब हो जाएंगे ‘प्रधान’

मुखिया का पदनाम प्रधान परामर्शी समिति ग्राम पंचायत होगा. प्रधान परामर्शी समिति वो सभी काम करेगी, जो एक निर्वाचित मुखिया करते हैं. इसी तरह तरह प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक और प्रखंड समन्वयक कार्यकारी समिति में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे. समिति की बैठक में मौजूद रहेंगे. इन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा. योजनाओं में अनियमितता को रोकने और विभाग के संज्ञान में लाने की जिम्मेदारी इनकी होगी.

किसे मिली कितनी शक्ति?

बता दें कि बिहार में पंचायत समिति की कुल संख्या 11 हजार 491 है. 16 जून के बाद पंचायत समिति के कार्यों के संचालन के लिए समिति के अध्यक्ष (प्रमुख) विघटित पंचायत समिति के प्रमुख होंगे. प्रमुख और पंचायत समिति के सभी सदस्य, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी और BDO समिति के सदस्य होंगे. परामर्शी समिति के अध्यक्ष का पदनाम प्रमुख की जगह प्रधान परामर्शी समिति, पंचायत समिति होगा. ये सभी कार्य निर्वाचित प्रमुख की तरह करेंगे. सरकारी सेवक सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे.

परामर्शी समिति को ही वास्तविक शक्ति

प्रदेश में कुल 1 हजार 161 जिला परिषद हैं. विघटित जिला परिषद के अध्यक्ष ही परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे. पंचायती राज अधिनियम के तहत सदस्य रहे व्यक्ति, DDC यानि कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद और जिला परिषद् के सभी सदस्य, जिला पंचायती राज पदाधिकारी परामर्शी समिति के सदस्य होंगे. अध्यक्ष का पदनाम प्रधान परामर्शी समिति, जिला परिषद होगा. ये सभी कार्य निर्वाचित प्रमुख की तरह करेंगे. सरकारी सेवक सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे.

गौरतलब है कि बिहार में ग्राम पंचायत की कुल संख्या 8 हजार 442 है. हालांकि, ग्राम पंचायत का विलय नगर परिषद में होने के कारण वर्तमान में ग्राम पंचायतों की संख्या 8 हजार 386 रह गई है. वार्ड सदस्यों की बात करें तो राज्य में वार्ड सदस्यों की संख्या 1 लाख 14 हजार 667 है

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