पूर्णिया कांड को लेकर ओवैसी की पार्टी AIMIM के व‍िधायक का क्‍या है चैलेंज? जानें

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पूर्णिया कांड को लेकर ओवैसी की पार्टी AIMIM के व‍िधायक का क्‍या है चैलेंज? जानें

Purnia News: पूर्णिया कांड पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के ब‍िहार की अमौर सीट से विधायक अख्तरुल ईमाम ने कहा है कि इस ममले में अलग रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबक‍ि यह मामला पूरी तरह से जमीन विवाद का है.

पूर्णिया. बिहार के पूर्णिया के बायसी थाना के मझुआ कांड पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष व अमौर के विधायक अख्तरुल ईमाम ने कहा कि यह पूरी तरह जमीन विवाद है. प्रशासन की विफलता के कारण इस तरह की घटना हुई है. इसको कुछ लोग अलग रंग देना चाहते हैं. उन्होंने चैलेंज देते हुए कहा कि इस इलाके में उनके जानकारी में कहीं रोहिंग्या मुसलमान नहीं है. अगर है तो प्रशासन क्या कर रहा है? बायसी के एआईएमआईएम के विधायक सैय्यद रुकनुद्दीन ने कहा कि प्रशासन घटना के बाद से लगातार कार्रवाई कर रही है. घटना के पीछे कुछ अपराधियों का हाथ है.

ब‍िहार सरकार के मंत्री ने कहा, पीड़‍ितों को द‍िया जाए मुआवजा और अन्‍य सुव‍िधाएं

वहीं इस मामले में बिहार सरकार के खनन एवं भूतत्व मंत्री जनक राम भी पीड़ित परिवार के हक और न्याय के लिए सामने आए हैं. जनक राम ने पूर्णिया के डीएम और एसपी को पत्र लिखकर एससी एसटी एक्ट के तहत मुआवजा देने, कपड़े, बर्तन और अन्य सुविधा देने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी दलित परिवार को घर देने के लिए भी डीएम को पत्र लिखा है. बिहार सरकार के मंत्री जनक राम ने कहा कि घटना के तत्काल बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने मामले को खुद संज्ञान लिया और सीएम के संज्ञान में मामला आते ही 5 आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है.

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने न्याय के साथ विकास की वचनबद्धता को दोहराया है. जनक राम ने कहा कि यह मामला सभ्य समाज के लिए हृदय विदारक घटना है, जो दलितों पर अत्याचार किया गया है. उन्होंने डीएम एसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी और कानूनी कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है. वहीं एसपी दयाशंकर ने बताया कि अबतक पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है. अन्य की गिरफ्तारी के लिये प्रयास किया जा रहा है.
जानें क्‍या कहना है हिन्दुवादी संगठन का?

वहीं हिन्दुवादी संगठन इस घटना के पीछे बड़ी साजिश बता रहे हैं. आरएसएस धर्म जागरण के प्रान्त प्रशासनिक प्रमुख राजीव श्रीवास्तव की माने तो इस इलाके में काफी दिनों से बड़ी साजिश रची जा रही है. कहीं न कहीं महादलितों और हिन्दुओं को भगाकर बिग बांग्‍लादेश का कॉन्‍सेप्‍ट रचा जा रहा है. इसके लिये राष्ट्रीय एजेन्सियों को ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी दूसरे समुदाय के लोगों ने डगरुआ के निखरैल में 1998 ईस्वी में 9 आदिवासियों को जिन्दा जलाकर मार दिया गया था. इस तरह की कई घटनाएं इस इलाके में लगातार हो रही है. वहीं हिन्दू जागरन मंच के प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य समरेन्द्र भारद्वाज का कहना है क‍ि जहां भी हिन्दू अल्पसंख्याक है उनके उपर हमला कर उन्हें पलायन करने के लिए विवश किया जा रहा है.

जानें ड‍िप्‍टी सीएम ने क्‍या कहा?

डिप्टी सीएम ने जानकारी देते हुए कहा है की जिला प्रशासन के अनुसार, सभी 13 पीड़ित परिवारों को सूखा राशन की आपूर्ति करते हुए अनुग्रह अनुदान की राशि मुहैया कराई गई है तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के मुताबिक, मुआवजा की राशि भी उपलब्ध कराई गई है. प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत उक्त अधिनियम के तहत मृतक सेवानिवृत्त चौकीदार मेवालाल राय के आश्रित को 412500 रुपए मुआवजा की राशि प्रथम किस्त के रूप में भुगतान हेतु कार्रवाई की गई है. उन्होंने बताया कि प्रभावित 13 परिवारों में से 7 परिवारों को पूर्व में वास भूमि उपलब्ध कराया गया था. शेष 6 परिवारों को आवास हेतु जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जिला प्रशासन, पूर्णिया के स्तर से की जा रही है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा सभी पीड़ित व्यक्तियों को भोजन, योग्य लाभुकों को पेंशन योजना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभान्वित करने की कार्रवाई की जा रही है. साथ ही, पीड़ित परिवारों के बीच मई 2021 का मुफ्त खाद्यान्न भी प्रावधान के अंतर्गत वितरित किया गया है तथा उन सभी के स्वास्थ्य जांच एवं इलाज हेतु मेडिकल कैंप लगाया गया है.

क्‍या है मामाला

19 मई को पूर्णिया के मझुवा में महादलितों के साथ अत्याचार की ये पहले घटना नहीं है. अगर पूर्णिया जिला के बड़े घटनाओं की चर्चा करें तो सबसे अधिक चर्चित रहे निखरैल कांड था. डगरुआ के निखरैल में 15 दिसम्बर 1998 को मोहमदिया स्टेट के लोगों ने 9 आदिवासियों को जिन्दा जलाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी थी. घटना के पीछे जमीन विवाद बताया जा रहा है. वहीं 22 नवम्बर 1971 ईस्वी को धमदाहा के रुपसपुर खगहा में 14 आदिवासियों की गोली मारकर और तलवार से काटकर निर्मम हत्या कर दी गई थी. 2002 ईस्वी में जमीन विवाद में कसमरा में 3 लोगों की हत्या कर दी गई थी. वहीं 2009 ईस्वी में के नगर के डरमिया घाट में चार आदिवासियों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इसके अलावे भी कई छोटी बड़ी घटनाएं है जो इस ईलाके में अक्सर होती रहती है . आखिर इन सब घटनाओं के पीछे जिम्मेवार कौन है 

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