बिहार: नदियों के कटाव से खौफजदा लोग तोड़ रहे अपना पक्का मकान,देखें हकीकत बयां करती तस्वीरें

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 बता दें कि पिछले साल भी बायसी अनुमंडल के तालवाडी, नागरा टोला,  सीमलवाडी गांव में करीब 300 मकान और सरकारी स्कूल समेत कई भवन कटकर नदी में विलीन हो गए थे. इस बार फिर नदियों में कटाव के डर से अब लोग अपने ही बनाए पक्के घरो को तोड रहे हैं.  नगरा टोला , सीमलवाडी में किस तरह लोग अपने बनाए बड़े-बड़े आशियाने को छेनी हथौड़े से तोड़ रहे हैं.

बता दें कि पिछले साल भी बायसी अनुमंडल के तालवाडी, नागरा टोला,  सीमलवाडी गांव में करीब 300 मकान और सरकारी स्कूल समेत कई भवन कटकर नदी में विलीन हो गए थे. इस बार फिर नदियों में कटाव के डर से अब लोग अपने ही बनाए पक्के घरो को तोड रहे हैं.  नगरा टोला , सीमलवाडी में किस तरह लोग अपने बनाए बड़े-बड़े आशियाने को छेनी हथौड़े से तोड़ रहे हैं

 नदी के कटाव के डर से अपने आशियाने को तोड़ रहे नगरा टोला के निवासी शमीम अख्तर, फईम अख्तर, शाहबाज आलम का कहना है कि पिछले साल भी इस इलाके में कनकई नदी के रौद्र रूप के कारण 300 घर, पक्के मकान और स्कूल कटकर नदी में समा गए थे. इसके बावजूद जिस तरह कटाव निरोधक काम होना चाहिए वह नहीं हो पाया. लिहाजा अपने ही बनाए मकान को तोड़कर सुरक्षित जगह पर जाने को विवश हैं.

नदी के कटाव के डर से अपने आशियाने को तोड़ रहे नगरा टोला के निवासी शमीम अख्तर, फईम अख्तर, शाहबाज आलम का कहना है कि पिछले साल भी इस इलाके में कनकई नदी के रौद्र रूप के कारण 300 घर, पक्के मकान और स्कूल कटकर नदी में समा गए थे. इसके बावजूद जिस तरह कटाव निरोधक काम होना चाहिए वह नहीं हो पाया. लिहाजा अपने ही बनाए मकान को तोड़कर सुरक्षित जगह पर जाने को विवश हैं.

 कनकई नदी ने पिछले साल भी रौद्र रूप अपनाया था. इसके बावजूद कुछ इलाके में तो कटाव निरोधक काम किया गया. लेकिन कई जगह कटाव निरोधक काम नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने आपस में चंदा कर खुद कटाव निरोधक काम शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि ना तो यहां के जनप्रतिनिधि और ना ही सरकारी अधिकारी उन लोगों की कुछ सुनते हैं. ऐसे में अब वे ग्रामीण लोग खुद चंदा कर कटाव निरोधक काम कर रहे हैं  ताकि जो भी बचा हुआ घर है उसे बचाया जा सके.

कनकई नदी ने पिछले साल भी रौद्र रूप अपनाया था. इसके बावजूद कुछ इलाके में तो कटाव निरोधक काम किया गया. लेकिन कई जगह कटाव निरोधक काम नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने आपस में चंदा कर खुद कटाव निरोधक काम शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि ना तो यहां के जनप्रतिनिधि और ना ही सरकारी अधिकारी उन लोगों की कुछ सुनते हैं. ऐसे में अब वे ग्रामीण लोग खुद चंदा कर कटाव निरोधक काम कर रहे हैं  ताकि जो भी बचा हुआ घर है उसे बचाया जा सके

 वहीं, अमौर के एआईएमआईएम पार्टी के विधायक अख्तरुल इमान ने कहा कि तालवाड़ी, नगरा टोला, सीमलबाड़ी समेत दर्जनों गांव में कई वर्षों से भीषण कटाव हो रहा है. पिछले साल भी कनकई नदी के कटाव के कारण नगरा टोला प्राथमिक विद्यालय कटकर नदी में विलीन हो गया था. इसके अलावा सिर्फ इस इलाके में करीब 300 मकान और कच्चे-पक्के घर भी नदी में समा गए हैं. कई लोगों को अभी तक मुआवजा भी नहीं मिला है. उन्होंने अपने स्तर से भी इस मामले में जिला प्रशासन और सरकार को पत्र लिखकर अधिकारियों को बुलाकर कटाव निरोधक कार्य करवाया है.

वहीं, अमौर के एआईएमआईएम पार्टी के विधायक अख्तरुल इमान ने कहा कि तालवाड़ी, नगरा टोला, सीमलबाड़ी समेत दर्जनों गांव में कई वर्षों से भीषण कटाव हो रहा है. पिछले साल भी कनकई नदी के कटाव के कारण नगरा टोला प्राथमिक विद्यालय कटकर नदी में विलीन हो गया था. इसके अलावा सिर्फ इस इलाके में करीब 300 मकान और कच्चे-पक्के घर भी नदी में समा गए हैं. कई लोगों को अभी तक मुआवजा भी नहीं मिला है. उन्होंने अपने स्तर से भी इस मामले में जिला प्रशासन और सरकार को पत्र लिखकर अधिकारियों को बुलाकर कटाव निरोधक कार्य करवाया है

 गौरतलब है कि बायसी अनुमंडल की आबादी करीब आठ लाख है.  इस इलाके की 5 मुख्य नदियां हर साल कटाव की भीषण पीड़ा देती हैं. लोग नदियों के रौद्र रूप के खौफ से परेशान हैं. लिहाजा इस बार नदियों का कटाव शुरू होने से पहले ही नदी  किनारे बसे लोग अपने ही बनाए आशियाने को तोड़कर सुरक्षित स्थलों की तलाश में जाने लगे हैं. ऐसे में जरूरत हैं सरकार और प्रशासन द्वारा इस इलाके में कटाव निरोधक कार्य किया जाए ताकि लोग नदियों के कटाव से बच सके.

गौरतलब है कि बायसी अनुमंडल की आबादी करीब आठ लाख है.  इस इलाके की 5 मुख्य नदियां हर साल कटाव की भीषण पीड़ा देती हैं. लोग नदियों के रौद्र रूप के खौफ से परेशान हैं. लिहाजा इस बार नदियों का कटाव शुरू होने से पहले ही नदी  किनारे बसे लोग अपने ही बनाए आशियाने को तोड़कर सुरक्षित स्थलों की तलाश में जाने लगे हैं. ऐसे में जरूरत हैं सरकार और प्रशासन द्वारा इस इलाके में कटाव निरोधक कार्य किया जाए ताकि लोग नदियों के कटाव से बच सके

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