जेएन कॉलेज नेहरा दरभंगा में प्रो. अबुल कलाम कासमी के दुखद निधन पर शोक सभा

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जेएन कॉलेज नेहरा दरभंगा में प्रो. अबुल कलाम कासमी के दुखद निधन पर शोक सभा

दरभंगा : प्रसिद्ध उर्दू आलोचक प्रो. अबुल कलाम कासमी के दुखद निधन पर जेएन कॉलेज नेहरा दरभंगा में शोक सभा का आयोजन किया गया.
बैठक को संबोधित करते हुए कॉलेज के उर्दू विभाग के लेक्चरर डॉ. अहमद अली जौहर ने कहा कि प्रो. अबुल कलाम कासमी उर्दू भाषा और साहित्य के प्रमुख आलोचक थे. आधुनिक समय में उर्दू आलोचना को महत्व और प्रतिष्ठा देने वाले आलोचकों में प्रो. अबुल कलाम कासमी की अपनी एक अलग पहचान है। प्रोफेसर अबुल कलाम कासमी की पूर्वी आलोचना और पूर्वी कविता पर गहरी नजर थी। उनकी पुस्तक “ओरिएंटल पोएट्री एंड द ट्रेडिशन ऑफ उर्दू क्रिटिसिज्म” एक प्रमुख उदाहरण है। यह पुस्तक पूर्वी आलोचना, इसके विभिन्न पहलुओं और भेदों का व्यापक अवलोकन प्रदान करती है। यह पुस्तक उर्दू आलोचना के लिए एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त है। प्रो. अबुल कलाम कासमी बहुत एक महान लेखक थे। वह उर्दू, अरबी और फारसी के साथ-साथ अंग्रेजी साहित्य में भी पारंगत थे। यह उनके लेखन में परिलक्षित होता है। उन्होंने बड़े उत्साह और समर्पण के साथ उर्दू साहित्य का अध्ययन किया था। शास्त्रीय और आधुनिक साहित्य दोनों पर उनकी गहरी नजर थी। वे आधुनिक साहित्य के सभी पहलुओं से भली-भांति परिचित थे। उन्होंने अपनी आलोचना में विभिन्न विज्ञानों और कलाओं से भी फ़ायदे उठाए। उनकी आलोचना की मुख्य विशेषता उनका सावधान और नियंत्रित दृष्टिकोण है। वह अपनी राय व्यक्त करने में बहुत सावधानी बरतते थे। इसलिए उनकी आलोचना अन्य समकालीन आलोचकों से इस मायने में भिन्न है कि अध्ययन की व्यापकता और विचार की परिपक्वता स्पष्ट है। प्रोफेसर अबुल कलाम कासमी ने साहित्य को सभी साहित्यिक कोणों से देख कर अपने आलोचनात्मक विचार व्यक्त करते थे। उनकी आलोचना की मुख्य विशेषता रचनात्मक ग्रंथों से अर्थ निकालना है।उनकी आलोचना का एक सौन्दर्यात्मक पहलू भी है। उन्होंने साहित्य के सौंदर्य पहलुओं पर विचार किया। प्रो. अबुल कलाम कासमी का आलोचनात्मक लेखन उर्दू आलोचना का एक उज्ज्वल अध्याय है जो उन्हें जीवित रखेगा। उनके निधन से उर्दू साहित्य और आलोचना को बहुत बड़ी क्षति हुई है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।
शोक सभा को सम्बोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अमरनाथ प्रसाद ने कहा कि लेखक समाज का शिल्पी होता है। विशेष रूप से महान लेखकों और बुद्धिजीवियों का समाज में बहुत महत्व है। उनकी अंतर्दृष्टि और विचार समाज को प्रकाश देते हैं। प्रोफेसर अबुल कलाम कासमी ऐसे ही लेखक और बुद्धिजीवी हैं। उर्दू ज्ञान और साहित्य की दुनिया उनके निधन पर शोक मना रही है और हम भी उनके निधन से बहुत दुखी हैं। उनके निधन से उर्दू ज्ञान और साहित्य को भारी क्षति हुई है। हम सभी प्रार्थना करते हैं कि भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।
कॉलेज के शिक्षक, डॉ श्यामानंद शांडिल्य, (मैथिली), डॉ संगीत रंजन नटवर, (अंग्रेजी), बिपिन कुमार (वाणिज्य), डॉ विक्रम कुमार, (हिंदी), कुमार नरेंद्र नीरज, (इतिहास), डॉ मनोरंजन कुमार, (रसायन विज्ञान), डॉ नीलेश मिश्रा, (भौतिकी), डॉ सुनीता कुमारी, (अर्थशास्त्र), डॉ शंभू राम, (राजनीति विज्ञान), शाहबाज अहमद, (गणित), डॉ रूपम कुमारी, (इतिहास), अनूप मिश्रा (राजनीति) विज्ञान) ने भी प्रो. अबुल कलाम कासमी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर महाविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थे।

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