हाथ में कपड़े टोकरी पर सेहरा उफनती नदी को पारकर पहुंचा ससुराल धूमधाम से हुआ निकाह

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हाथ में कपड़े टोकरी पर सेहरा उफनती नदी को पारकर पहुंचा ससुराल धूमधाम से हुआ निकाह

फर्रुखाबाद. प्यार के आगे पहाड़ भी आ जाए तो तोड़ कर रास्ता बना ही दिया जाता है. मांझी ने भी कुछ ऐसा ही किया था. लेकिन अब कानपुर का एक ऐसा मांझी सामने आया है जिसने अपने प्यार को पाने के लिए बाढ़ को भी नजरअंदाज कर दिया और उफनती नदी को पार कर अपने जूनून को पूरा किया. ये कहानी है फर्रुखाबाद के गांव पंखिया नगला में रहने वाले मोहसिन की. मोहसिन का निकाह उन्नाव की युवती से तय हुआ. निकाह के लिए 2 अगस्त की तारीख तय की गई. लेकिन इसी दौरान गंगा में बाढ़ आ गई और मोहसिन का गांव चारों तरफ से पानी में घिर गया. गंगा का पानी कई फीट ऊपर चल रहा था और बाढ़ अपने चरम पर थी. ऐसे में एक नाव वाला अल्लाह का दूत बन कर सामने आया और दूल्हे को उस पार ले जाने के लिए राजी हुआ. हालांकि समस्या केवल नदी को पार करना ही नहीं था.

पूरे गांव में भरा था पानी
बाढ़ का पानी पूरे गांव में भरा था. ऐसे में मोहसिन का शादी के लिए तैयार होकर घर से निकलना भी संभव नहीं हो रहा था. लेकिन उसके जुनून के आगे पानी कुछ न कर सका. उसने अपनी पैंट उतारकर हाथ में पकड़ी, सेहरे को एक टोकरी में रखा और निकल पड़ा. उसके पीछे-पीछे सभी बराती भी बाढ़ के पानी से होते हुए ही आगे बढ़े. नदी पार करने के बाद बरात बिलावलपुर गांव पहुंची और वहां से सभी कार में बैठ कर आगे के लिए रवाना हुए.

रह गए कई अरमान
दूल्हे की इस तरह से रवानगी के चलते रस्मों रिवाज के कई अरमान अधूरे ही रह गए. दूल्हे का जीजा रज्जाक अपने साले मोहसिन को न तो शेरवानी पहना सका और न ही सेहरा पहनाने की रस्म अदा कर सका. वहीं बारात भी पानी और न बढ़ जाए इसके चलते जल्दी ही अपने गंतव्य की ओर रवाना हुई तो न कोई जश्न दिखा न ही गाना बजाना. हालांकि कुछ दिक्कतों को पार करने के बाद बारात ने आगे का रास्ता धूमधाम से पार किया और सभी रस्मो रिवाज के साथ निकाह पूरा हुआ. इसी के साथ मोहसिन को अपना प्यार हजार परेशानियों के बाद आखिर मिल गया.

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