PM केयर्स फंड से खरीदे गए वेंटिलेटर निकले घटिया, मेडिकल कॉलेज में भेजे गए 80 वेंटिलेटर-71 हुए खराब

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पीएम केयर्स फंड के नाम पर लूट का बाजार चल रहा है। पीएम केयर्स फंड की ओर से मंगाए जा रहे मेडिकल उपकरणों की क्वालिटी संदेह के घेरे में है। मामला पंजाब के फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज का है।

यहां पर पिछले साल पीएम केयर्स फंड की ओर से गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर्स भेजे गए थे।

इनमें से बड़ी संख्या में वेंटिलेटर्स इस्तेमाल में नहीं लाए जा रहे हैं क्योंकि इनकी क्वालिटी बेहद घटिया है।

बताया जा रहा है कि ये वेंटिलेटर्स इतने घटिया क्वालिटी के हैं कि ये कुछ देर तो चलते हैं और उसके बाद अपने आप बंद हो जाते हैं।

पीएम केयर्स फंड की ओर से गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज फरीदकोट में 80 वेंटिलेटर्स की आपूर्ति की गई थी, इनमें से 71 वेंटिलेटर्स खराब हैं। ये सभी 71 वेंटिलेटर्स एक या दो घंटे तक चलते हैं और उसके बाद खुद से बंद हो जाते हैं।

वहीं फरीदकोट, पंजाब के बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के वीसी ने भी वेंटिलेटर्स की शिकायत करते हुए कहा कि हमें पीएम केयर्स फंड के तहत 82 वेंटिलेटर्स दिए गए। इनमें से 82 शुरुआती दौर से ही नाकाम स्थिति में हैं क्योंकि इनकी क्वालिटी बेहद घटिया है।

मालूम हो कि पंजाब सरकार के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने पंजाब सरकार को एक पत्र लिखकर पीएम केयर्स फंड में मिले मेडिकल उपकरणों विशेष कर वेंटिलेटर्स की क्वालिटी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि हमारे राज्य की जरुरतों के अनुसार हमें 809 वेंटिलेटर्स भेजे गए थे।

लेकिन इसमें से महज 558 वेंटिलेटर्स का ही इस्तेमाल हो पा रहा है बाकी 251 वेंटिलेटर्स ऐसे ही रखे गए हैं क्योंकि इनकी क्वालिटी बेहद घटिया है।

अनेस्थेसिस्ट्स का कहना है कि भारत सरकार की ओर से भेजे गए इन वेंटिलेटर्स की क्वालिटी भरोसे के लायक नहीं है।जब इन मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, तब ये अचानक से काम करना बंद कर देते हैं।

ऐसे में यह मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। हम अपने मरीजों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते।

कोविड काल में इस तरह से घटिया वेंटिलेटर्स की वजह से पंजाब के अस्पतालों की परेशानी बढ़ गई है। एक तरफ तो अस्तपाल में लगातार कोविड मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। उनके इलाज के लिए बिल्कुल दुरुस्त और बढ़िया क्वालिटी के वेंटिलेटर्स की जरुरत है।

घटिया वेंटिलेटर्स की शिकायतों के बाद अब पंजाब सरकार ने इमरजेंसी मोड में काम करते हुए तत्काल तकनीशियन और इंजीनियरों की बहाली का फैसला किया है.

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