UPके पूर्व CM अखिलेश को भारी ना पड़ जाए आज़म खान से बेरुखी चुनाव से पहले बढ़ने लगी अखिलेश की भी चिंता

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UPके पूर्व CM अखिलेश को भारी ना पड़ जाए आज़म खान से बेरुखी चुनाव से पहले बढ़ने लगी अखिलेश की भी चिंता

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कहते हैं कि आजम खान हमारे दिल में बसते हैं. वहीं दूसरी और आजम खान के समर्थन में जब कहीं पर प्रदर्शन होता है तो प्रदर्शन करने वाले कहते हैं कि अखिलेश यादव इस मामले में सिर्फ ट्वीट करने तक ही सीमित होकर के रह गए. आजम खान से बेरुखी का अखिलेश यादव पर ऐसे लोग सीधा आरोप लगाते हैं. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र हाथों में आजम खान के पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते हैं और आवाज बुलंद करते हैं कि राष्ट्रपति जी आजम खान के मामले में हस्तक्षेप कीजिए तो वही अखिलेश यादव पर नाराजगी का इजहार किया जाता है और कहा जाता है कि अखिलेश यादव को जिस तरह से आजम खान के मामले में सक्रियता दिखानी चाहिए थी अफसोस वो वैसा नहीं कर सके।

अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से आजम खान के मामले में काफी सक्रिय तो नजर आते हैं और वह प्रेस वार्ता से लेकर अपने ट्वीट और बयानों में यह जाहिर करते हैं कि वह आजम खान से कितना प्रेम करते हैं और उनकी नजर में आजम खान की कितनी अहमियत है लेकिन दूसरी और समाजवादी पार्टी में ही ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो यह मानते हैं कि अखिलेश यादव ने आजम खान के मामले में ऐसा कुछ नहीं किया जिससे यह लगे कि उनकी नजर में आजम खान की वह अहमियत है कि जो कभी उनके पिता के दौर में या फिर उनकी नज़र में हुआ करती थी. आजम खान समाजवादी पार्टी की सरकार में नंबर दो की पोजीशन में रहे और एक कद्दावर नेता के तौर पर उनकी पहचान रही. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के संस्थापकों में भी आजम खान शुमार रहे और पार्टी को जमीन से आसमान तक पहुंचाने में भी इस नेता की बड़ी भूमिका रही

जब-जब आजम खान को लगा कि पार्टी में उनको नजरअंदाज किया जा रहा है या उनके सामने किसी नेता को ज्यादा अहमियत दी जा रही है या उनकी कोई बात अनसुनी की जा रही है तभी आजम खान नाराज हो गए तो फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव उनको मनाने में जुट गए और आखिरकार वह उनको मनाने में कामयाब भी रहे. इससे पता चलता है कि मुलायम सिंह यादव आजम खान को कितनी अहमियत दिया करते थे लेकिन आज वही आजम खान हैं जो जेल में बंद हैं और उनकी तबीयत भी काफी वक्त से खराब चल रही है और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

आजम खान पर जितने मुकदमे हैं उसमें वह कितने दोषी हैं और कितने बेक़सूर तो इसका फैसला तो अदालत करेगी. लेकिन बार-बार एक बड़ी संख्या में लोगों के दिल और दिमाग में सवाल उठता है कि अखिलेश यादव ने आखिर आजम खान के प्रति बेरुखी वाला रवैया क्यों इख़्तियार किया. एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी से लेकर कांग्रेस के कई नेता आरोप लगाते हैं कि अखिलेश यादव की नजर में आजम खान की कोई अहमियत नहीं है जिसकी वजह से आज आजम खान की यह हालत है. ऐसे में कहीं ना कहीं ये सवाल जरूर उठता है कि क्या 2022 में अखिलेश यादव पर आजम खान का मामला भारी पड़ने वाला है. क्योंकि एक बड़ी संख्या में लोग कम या ज़्यादा तौर पर अखिलेश यादव से आजम खान मामले को लेकर नाराज हैं और यह वही लोग हैं जो उस समुदाय से आते हैं कि जिस समुदाय ने समाजवादी पार्टी को जमीन से आसमान तक पहुंचाने में अहम रोल निभाया था।

अखिलेश यादव आजम खान के मामले में कितनी भी सफाई दें और कितना भी यह कहे कि आजम खान हमारे दिल में बसते हैं हम उनके लिए बहुत कुछ कर रहे हैं लेकिन अखिलेश यादव आजम खान के उन समर्थकों की नाराजगी दूर करने में नाकाम ही साबित हुए हैं कि जो किसी ना किसी तौर पर आजम खान के लिए अखिलेश यादव पर नाराजगी का इजहार करते हैं. ऐसे लोग दबी जुबान में या स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि 2022 में आजम खान का मामला अखिलेश यादव पर किसी ना किसी तरह से जरूर भारी पड़ेगा और उन्हें इसका सियासी नुकसान उठाना पड़ेगा. हालांकि यहां यह बात भी स्पष्ट है कि आजम खान के परिवार वाले अखिलेश यादव पर पूरा भरोसा जताते हैं

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